करीब चार महीने से अधिक समय तक चले तनाव और सैन्य टकराव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापित होने की उम्मीदें काफी मजबूत हो गई हैं। दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण सहमति बन चुकी है और अब इस समझौते को औपचारिक रूप देने की तैयारी चल रही है। मध्यस्थ देशों की ओर से भी इसकी पुष्टि की गई है। जानकारी के अनुसार, 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने वाले एक कार्यक्रम के दौरान दोनों पक्ष शांति समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर करेंगे। इस संभावित समझौते के साथ ही दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी फिर से खोलने की प्रक्रिया शुरू होगी, जो भारत समेत कई देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है।
फरवरी में शुरू हुए इस संघर्ष के बाद वैश्विक तेल बाजारों में भारी अस्थिरता देखने को मिली थी। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़े खतरे और समुद्री गतिविधियों में रुकावट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। ऐसे में युद्ध समाप्ति और जलमार्ग खुलने की खबर को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है।
पाकिस्तान ने शांति समझौते की पुष्टि कीपाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पर एक संदेश जारी करते हुए कहा कि लंबे और गंभीर कूटनीतिक प्रयासों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने लेबनान समेत विभिन्न मोर्चों पर जारी सभी सैन्य गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से और स्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया है। उन्होंने इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
शहबाज शरीफ ने अपने बयान में कहा कि इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर शुक्रवार, 19 जून को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे। उन्होंने अमेरिका और ईरान दोनों की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों ने विवाद के समाधान के लिए सैन्य रास्ते के बजाय कूटनीति और संवाद को प्राथमिकता दी, जो स्वागत योग्य कदम है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग देने वाले देशों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से कतर की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि उसके नेतृत्व ने मध्यस्थता में अहम योगदान दिया। साथ ही सऊदी अरब और तुर्की को भी धन्यवाद दिया, जिनके सहयोग और समर्थन ने समझौते को अंतिम रूप तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने आगे कहा कि समझौते की घोषणा के बाद मध्यस्थ देशों की ओर से इस सप्ताह कई बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इन बैठकों में तकनीकी पहलुओं, कार्यान्वयन प्रक्रिया और आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी, ताकि समझौते को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
ट्रंप बोले- तेल आपूर्ति फिर होगी सामान्यअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस संभावित समझौते को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह समझौता पूरे पश्चिम एशिया में स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देगा। ट्रंप ने दावा किया कि उनसे पहले कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने ईरान के साथ स्थायी शांति स्थापित करने की कोशिश की थी, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो सके।
ट्रंप ने कहा कि क्षेत्रीय नेताओं को अब पहली बार ऐसा अमेरिकी नेतृत्व मिला है जो वास्तविक और टिकाऊ शांति सुनिश्चित करने में सक्षम है। उन्होंने बताया कि 19 जून को समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद समुद्री मार्गों में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने का काम शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते दोनों दिशाओं में जहाजों की आवाजाही बहाल हो सकेगी और वैश्विक तेल आपूर्ति फिर से सामान्य हो जाएगी।
तेहरान में हुई थी अहम कूटनीतिक कवायदइस बीच समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में कतर ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। शांति वार्ता के निर्णायक चरण में प्रवेश करने से पहले कतर के प्रतिनिधि रविवार को तेहरान पहुंचे थे, जहां उन्होंने दोनों पक्षों के बीच मौजूद शेष मुद्दों पर चर्चा की। इन बैठकों का उद्देश्य समझौते की शर्तों को अंतिम रूप देना और औपचारिक सहमति सुनिश्चित करना था।
समाचार एजेंसी एपी से बातचीत में कुछ अधिकारियों ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया था कि अमेरिका और ईरान एक ऐसे समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं, जो न केवल लंबे समय से चल रहे युद्ध को समाप्त कर सकता है बल्कि हजारों लोगों की जान लेने वाले इस संघर्ष को स्थायी रूप से रोकने का रास्ता भी तैयार कर सकता है।
अधिकारियों के अनुसार, समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलना है। इस जलमार्ग के बंद होने से दुनिया भर के शेयर बाजारों, ऊर्जा क्षेत्र और व्यापारिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा था। ऐसे में इसके फिर से खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता लौटने और वैश्विक व्यापार को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।