आम जनता पर महंगाई की मार! मई में थोक महंगाई 9.68% पर पहुंची, खाने-पीने से लेकर ईंधन तक सब हुआ महंगा

देश में महंगाई ने एक बार फिर आम लोगों की जेब पर दबाव बढ़ा दिया है। बाजार में कीमतों में राहत की उम्मीद कर रहे उपभोक्ताओं को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। थोक बाजार स्तर पर महंगाई में तेजी से उछाल दर्ज किया गया है, जिससे न सिर्फ सरकार बल्कि आम नागरिकों की चिंता भी बढ़ गई है। मई महीने के आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में खुदरा बाजार में भी महंगाई का असर और अधिक महसूस किया जा सकता है।

अप्रैल के मुकाबले मई में महंगाई में तेज बढ़ोतरी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 9.68 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह वृद्धि इसलिए भी चिंता बढ़ाने वाली है क्योंकि अप्रैल 2026 में यही दर 8.26 प्रतिशत थी। मात्र एक महीने के भीतर आई इस तेज उछाल ने बाजार की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि थोक स्तर पर बढ़ती कीमतों का सीधा असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार तक पहुंचता है, जिससे आम उपभोक्ता के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

पिछले एक साल का थोक महंगाई का उतार-चढ़ाव

पिछले बारह महीनों में थोक महंगाई दर में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है—


मई 2025 में यह मात्र 0.39% थी, जो जून 2025 में -0.13% और जुलाई 2025 में -0.58% तक नीचे चली गई थी। इसके बाद अगस्त 2025 में हल्की बढ़त के साथ यह 0.52% पर पहुंची, जबकि सितंबर 2025 में 0.13% रही। अक्टूबर 2025 में यह फिर -1.21% तक गिर गई और नवंबर में -0.32% दर्ज की गई।

इसके बाद दिसंबर 2025 में यह 0.83% पर लौटी और जनवरी 2026 में 1.81% तक पहुंची। फरवरी में 2.13% और मार्च 2026 में 3.88% दर्ज की गई। अप्रैल 2026 में यह अचानक बढ़कर 8.26% हो गई और मई 2026 में यह और बढ़ते हुए 9.68% पर पहुंच गई।
ईंधन, बिजली और कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव

थोक महंगाई में आई इस तेज वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण ईंधन, बिजली और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी को माना जा रहा है। इन क्षेत्रों में लागत बढ़ने से उत्पादन और परिवहन दोनों महंगे हो गए हैं।

ईंधन और बिजली के क्षेत्र में महंगाई अप्रैल में 24.89 प्रतिशत थी, जो मई में बढ़कर 30.33 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में भी बड़ी छलांग देखने को मिली, जहां यह अप्रैल के 56.31 प्रतिशत से बढ़कर मई में 61.51 प्रतिशत तक पहुंच गया।

वैश्विक तनाव का असर: तेल आपूर्ति पर दबाव


जानकारों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में उत्पन्न बाधाओं ने कच्चे तेल की आपूर्ति को प्रभावित किया है। यह वही प्रमुख समुद्री मार्ग है, जिससे भारत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने के कारण भारत में भी इसका सीधा असर देखने को मिला और मई के दूसरे हिस्से में पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

खाने-पीने की वस्तुएं और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी प्रभावित


ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच चुका है। ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स महंगे होने के कारण खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई मई में बढ़कर 3.60 प्रतिशत हो गई, जबकि अप्रैल में यह 2.43 प्रतिशत थी।

इसके अलावा, फैक्ट्री स्तर पर बनने वाले उत्पादों की लागत में भी इजाफा हुआ है। मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की महंगाई दर अप्रैल के 6.68 प्रतिशत से बढ़कर मई 2026 में 7.48 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

कुल मिलाकर, बढ़ती थोक महंगाई ने अर्थव्यवस्था के कई अहम सेक्टरों को प्रभावित किया है और आने वाले समय में इसका असर खुदरा बाजार में और गहराई से देखने को मिल सकता है।