AAP से बाहर किए गए किस पुराने साथी के साथ फिर काम करना चाहते हैं केजरीवाल? राघव चड्ढा के BJP में जाने पर भी बोले

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपने पुराने राजनीतिक साथियों को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि वह अपने किन पुराने सहयोगियों के साथ दोबारा काम करना चाहेंगे, तो उन्होंने कई नामों में से खास तौर पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और AAP के संस्थापक सदस्यों में रहे प्रशांत भूषण का जिक्र किया। केजरीवाल ने प्रशांत भूषण की तारीफ करते हुए कहा कि वह आज भी उनका सम्मान करते हैं और अगर मौका मिले तो उनके साथ दोबारा काम करने के लिए तैयार हैं।

केजरीवाल का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि प्रशांत भूषण कभी आम आदमी पार्टी के शुरुआती दौर के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। हालांकि, पार्टी के गठन के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच मतभेद सामने आने लगे थे और अप्रैल 2015 में प्रशांत भूषण को पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोपों के चलते AAP से बाहर कर दिया गया था। उनके साथ योगेंद्र यादव और प्रोफेसर आनंद कुमार को भी पार्टी से निष्कासित किया गया था।

प्रशांत भूषण के साथ फिर काम करने को तैयार केजरीवाल

एक यूट्यूब पॉडकास्ट के दौरान अरविंद केजरीवाल से पूछा गया कि वह अपने पुराने साथियों में से किसके साथ दोबारा काम करना पसंद करेंगे। इस सवाल पर उन्होंने शुरुआत में कहा कि वह सभी के साथ काम करना चाहेंगे। हालांकि, इसके बाद उन्होंने खास तौर पर प्रशांत भूषण का नाम लिया और उनके व्यक्तित्व की तारीफ की।

केजरीवाल ने कहा कि प्रशांत भूषण के साथ उनकी करीब 20 साल पुरानी दोस्ती रही है। उन्होंने माना कि दोनों के अलग होने के पीछे उस समय कई परिस्थितियां थीं, लेकिन इसके बावजूद उनके मन में प्रशांत भूषण के लिए आज भी सम्मान कायम है। केजरीवाल ने उन्हें एक अच्छा इंसान बताते हुए कहा कि वह उनकी इज्जत करते हैं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या मौजूदा समय में उनकी प्रशांत भूषण से बातचीत होती है, तो केजरीवाल ने इसका जवाब न में दिया। हालांकि, उन्होंने सोशल मीडिया पर एक-दूसरे के पोस्ट या विचारों को साझा करने की संभावना को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया।

केजरीवाल ने कहा कि अगर प्रशांत भूषण की ओर से कोई अच्छा ट्वीट या विचार सामने आता है तो उसे रीट्वीट करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया कि वह प्रशांत भूषण का सम्मान करते हैं।

जब उनसे सीधे सवाल किया गया कि क्या भविष्य में वह प्रशांत भूषण के साथ फिर से काम कर सकते हैं, तो केजरीवाल ने स्पष्ट तौर पर कहा कि हां, वह ऐसा जरूर कर सकते हैं। उनके इस बयान के बाद दोनों नेताओं के पुराने रिश्ते और राजनीतिक सफर को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।
2015 में AAP से बाहर कर दिए गए थे प्रशांत भूषण

गौरतलब है कि प्रशांत भूषण आम आदमी पार्टी के शुरुआती दौर में पार्टी के महत्वपूर्ण चेहरों में शामिल रहे थे। वह पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और संगठन के शुरुआती राजनीतिक सफर में उनकी अहम भूमिका रही थी।

हालांकि, समय के साथ पार्टी के भीतर मतभेद बढ़ते गए। अप्रैल 2015 में प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को पार्टी विरोधी गतिविधियों तथा अनुशासनहीनता के आरोपों के चलते AAP से निष्कासित कर दिया गया था। प्रोफेसर आनंद कुमार को भी उसी दौर में पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया था।

उस समय पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन से जुड़े कई मुद्दों को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए थे। इसके बाद प्रशांत भूषण और अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक राहें अलग हो गईं। दोनों ने आगे अलग-अलग तरीके से अपनी राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां जारी रखीं।

इसके बावजूद अब केजरीवाल का प्रशांत भूषण को लेकर सकारात्मक बयान यह संकेत देता है कि वर्षों बाद भी वह अपने पुराने सहयोगी के प्रति व्यक्तिगत सम्मान बनाए हुए हैं। हालांकि, दोनों के बीच किसी तरह की औपचारिक राजनीतिक साझेदारी को लेकर फिलहाल कोई घोषणा नहीं हुई है।

राघव चड्ढा के AAP छोड़ने पर क्या बोले केजरीवाल?

इसी बातचीत के दौरान अरविंद केजरीवाल से आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने वाले नेताओं को लेकर भी सवाल किया गया। खास तौर पर राघव चड्ढा समेत सात सांसदों के पार्टी से अलग होने और बीजेपी का रुख अपनाने के बारे में उनसे प्रतिक्रिया मांगी गई।

राघव चड्ढा को लेकर सवाल पूछे जाने पर केजरीवाल ने शुरुआत में किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि वह किसी के बारे में व्यक्तिगत तौर पर बात करने में विश्वास नहीं रखते। हालांकि, जब उनसे सीधा पूछा गया कि क्या उन्हें पहले से अंदाजा था कि राघव चड्ढा पार्टी छोड़ सकते हैं, तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें इसकी जानकारी या कोई अनुमान नहीं था।

केजरीवाल ने कहा कि उन्हें इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि कौन पार्टी छोड़कर जाएगा। उनके मुताबिक, उन्होंने इस तरह के किसी घटनाक्रम की कल्पना नहीं की थी।

भरोसेमंद नेताओं के जाने पर क्या बोले पूर्व सीएम?

अरविंद केजरीवाल से यह भी पूछा गया कि आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले सात सांसदों में से कुछ ऐसे नेता भी थे, जिन पर वह काफी भरोसा करते थे। इस सवाल पर उन्होंने कहा कि अब इस स्थिति में किया ही क्या जा सकता है।

केजरीवाल ने कहा कि जो लोग पार्टी छोड़कर चले गए, वे अपनी इच्छा से गए हैं और अब जहां हैं, वहां खुश रहें। उन्होंने यह भी कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि पार्टी छोड़कर दूसरे राजनीतिक दल में जाने वाले नेता अब खुश होंगे।

उनके इस बयान को राजनीतिक तौर पर काफी संयमित प्रतिक्रिया माना जा रहा है। केजरीवाल ने इस दौरान किसी नेता के खिलाफ व्यक्तिगत हमला करने से बचते हुए यह संकेत देने की कोशिश की कि वह पुराने साथियों के फैसलों पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते।

पुराने साथियों और नए राजनीतिक समीकरणों के बीच केजरीवाल का बयान अहम

अरविंद केजरीवाल का प्रशांत भूषण के साथ दोबारा काम करने की इच्छा जताना ऐसे समय में सामने आया है, जब आम आदमी पार्टी के कई पुराने और चर्चित चेहरों के साथ उनके रिश्ते बदल चुके हैं। पार्टी के शुरुआती दौर में साथ रहे कई नेताओं की राहें बाद में अलग हो गईं और अब AAP की राजनीति एक अलग चरण में पहुंच चुकी है।

वहीं, राघव चड्ढा समेत कई सांसदों के पार्टी छोड़ने के सवाल पर केजरीवाल का यह कहना कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी, पार्टी के भीतर बदलते समीकरणों को लेकर चर्चा को और बढ़ा सकता है।

फिलहाल केजरीवाल के बयान का सबसे खास हिस्सा प्रशांत भूषण को लेकर उनका रुख है। करीब एक दशक से ज्यादा समय पहले राजनीतिक तौर पर अलग हुए दोनों नेताओं के बीच भले ही अब नियमित बातचीत नहीं होती हो, लेकिन केजरीवाल का कहना है कि उनके मन में प्रशांत भूषण के लिए आज भी सम्मान है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में दोनों के बीच सिर्फ व्यक्तिगत संपर्क बढ़ता है या फिर किसी तरह का राजनीतिक सहयोग भी देखने को मिलता है।