अजमेर नगर निगम के मेयर पद के चुनाव से पहले कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल को बड़ी राहत मिली है। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान भाजपा प्रत्याशी अनामिका शर्मा की ओर से उनके नामांकन के खिलाफ दर्ज कराई गई आपत्ति को खारिज कर दिया गया है। इसके साथ ही किरण गढ़वाल का नामांकन बरकरार है और अब मेयर पद के लिए भाजपा की अनामिका शर्मा तथा कांग्रेस की किरण गढ़वाल के बीच मुकाबला होना तय हो गया है। अजमेर नगर निगम में मेयर पद के लिए मतदान 21 सितंबर को कराया जाएगा।
किरण गढ़वाल के नामांकन पर भाजपा ने जताई थी आपत्तिनामांकन जांच के दौरान भाजपा प्रत्याशी अनामिका शर्मा की ओर से कांग्रेस उम्मीदवार किरण गढ़वाल के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई गई थी। आपत्ति में नगर निगम की बकाया राशि से संबंधित मुद्दा उठाने के साथ ही नामांकन पत्र में आवश्यक जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था।
हालांकि, जांच के बाद संबंधित आपत्ति को खारिज कर दिया गया। इसके बाद किरण गढ़वाल का नामांकन चुनाव प्रक्रिया में बना हुआ है। नामांकन बरकरार रहने से अब मेयर पद के चुनाव में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के बीच मुकाबले का रास्ता साफ हो गया है।
भाजपा और कांग्रेस के बीच मेयर पद के लिए मुकाबलाअजमेर नगर निगम के मेयर चुनाव में भाजपा ने अनामिका शर्मा को अपना प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस की ओर से किरण गढ़वाल मैदान में हैं। किरण गढ़वाल वार्ड 57 से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर पार्षद बनी हैं।
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों दलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी बोर्ड बनाने के लिए जरूरी समर्थन जुटाने की स्थिति में है। दूसरी ओर, भाजपा भी अपने पक्ष में बहुमत होने का दावा कर रही है। हालांकि, मेयर चुनाव में जीत के लिए जरूरी संख्या जुटाना दोनों दलों के सामने महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।
80 वार्डों में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहींअजमेर नगर निगम में कुल 80 वार्ड हैं। हालिया चुनाव परिणामों में किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। कांग्रेस 37 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है, जबकि भाजपा के खाते में 32 सीटें आई हैं। इसके अलावा 11 निर्दलीय पार्षदों ने भी जीत दर्ज की है।
मेयर पद के चुनाव में बहुमत का आंकड़ा 41 पार्षदों का है। इस लिहाज से कांग्रेस को बहुमत तक पहुंचने के लिए चार और पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी। वहीं भाजपा को बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के लिए नौ पार्षदों का समर्थन जुटाना पड़ेगा।
निर्दलीय पार्षदों की संख्या को देखते हुए उनका रुख मेयर चुनाव और बोर्ड गठन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकता है। दोनों प्रमुख दलों के पास अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा नहीं है, इसलिए समर्थन जुटाने की रणनीति चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा बन गई है।
पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिशमेयर चुनाव से पहले कांग्रेस और भाजपा अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश कर रही हैं। इसी क्रम में दोनों दलों ने अपने पार्षदों को अलग-अलग स्थानों पर रखा है। कांग्रेस के पार्षदों को अजमेर से बाहर ले जाने की जानकारी सामने आई है।
कांग्रेस के पार्षदों को बेंगलुरु शिफ्ट किए जाने की चर्चा भी है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पार्षदों को सुरक्षित रखने और चुनाव के दौरान समर्थन बनाए रखने को लेकर दोनों दलों की तैयारियां जारी हैं।
फिलहाल भाजपा की आपत्ति खारिज होने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल का नामांकन कायम है। अब अजमेर नगर निगम के मेयर पद के लिए अनामिका शर्मा और किरण गढ़वाल के बीच चुनाव होगा, जबकि मतदान की तारीख 21 सितंबर निर्धारित है।