जगदीप धनखड़ का इस्तीफा मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने औपचारिक रूप से स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया, लेकिन इस्तीफे की टाइमिंग और तरीका राजनीतिक गलियारों में कई अटकलों को जन्म दे रहा है।
दरअसल, सोमवार की रात अचानक उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ बिना किसी पूर्व निर्धारित अपॉइंटमेंट के राष्ट्रपति भवन पहुंच गए। बताया जा रहा है कि उनके आगमन की कोई सूचना न होने के कारण अधिकारियों में हड़कंप मच गया। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रात करीब 9 बजे धनखड़ जैसे ही राष्ट्रपति भवन पहुंचे, सैन्य सचिव को तुरंत सूचित करने के लिए ADC दौड़ पड़े। इसके तुरंत बाद आनन-फानन में राष्ट्रपति मुर्मू से उनकी मीटिंग तय की गई और उसी दौरान उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया। यह जानकारी रात 9:25 बजे सार्वजनिक की गई।
सोमवार को दिनभर रहे सक्रिय, फिर रात में इस्तीफा:ध्यान देने वाली बात यह है कि सोमवार को उपराष्ट्रपति पूरे दिन सदन की कार्यवाही में शामिल रहे और विभिन्न बैठकों में भाग लेते रहे। यहां तक कि उनके राजस्थान दौरे से संबंधित प्रेस बयान भी मीडिया को जारी किया गया था। ऐसे में रात को अचानक इस्तीफा देने का निर्णय और उसका तरीका राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर रहा है।
क्या भाजपा नेतृत्व से कोई मतभेद था?:कुछ विश्लेषकों का मानना है कि संभव है धनखड़ और भाजपा नेतृत्व के बीच किसी मुद्दे पर विचारों में मतभेद हो गया हो, जो इस अचानक उठाए गए कदम की वजह बना हो। सूत्रों के अनुसार, धनखड़ हाल के कुछ संवैधानिक मसलों पर अपनी स्वतंत्र राय रखने के लिए जाने जा रहे थे, जिससे भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व असहज महसूस कर रहा था। हालांकि इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की तैयारी तेज:धनखड़ के इस्तीफे के बाद निर्वाचन आयोग जल्द ही नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की घोषणा करेगा। पीटीआई भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उनके इस्तीफे की अधिसूचना जारी कर दी है और चुनाव प्रक्रिया के लिए रास्ता साफ हो गया है। लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य — जिसमें मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं — मिलकर उपराष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। नियमों के अनुसार, अधिसूचना जारी होने की तारीख से लेकर मतदान की प्रक्रिया पूरी करने तक अधिकतम 30 दिन की समयसीमा निर्धारित होती है।
मोदी की वापसी के बाद ही तय होगा नाम:सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चार दिवसीय विदेश यात्रा (ब्रिटेन और मालदीव) से लौटने के बाद ही नए उपराष्ट्रपति की तलाश शुरू होगी। बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि इस बार कोई ऐसा चेहरा सामने लाया जाएगा जो पार्टी की विचारधारा को मजबूती से आगे बढ़ा सके, लेकिन साथ ही संवैधानिक गरिमा का भी ध्यान रखे।
सियासी हलचलों का दौर:राजनीतिक विश्लेषक इसे राष्ट्रपति भवन और सत्ता के शीर्ष पदों पर हो रहे नरम संघर्ष से भी जोड़ रहे हैं। विपक्षी दलों ने भी इसे लोकतंत्र की पारदर्शिता पर सवाल बताते हुए केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट कर पूछा, अगर इस्तीफा सिर्फ स्वास्थ्य कारणों से था तो इतनी गोपनीयता क्यों रखी गई?
धनखड़ के इस्तीफे और उसके बाद उठे राजनीतिक तूफान ने यह साफ कर दिया है कि देश की शीर्ष राजनीति में कुछ बड़ा घटा है, जिसका असर आने वाले दिनों में उपराष्ट्रपति पद के चुनाव और केंद्रीय सत्ता संतुलन पर साफ दिखेगा।