सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद एक्शन में CM रेखा गुप्ता, 5 मंजिल वाले भवनों की होगी तत्काल जांच

नई दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत के ढहने से हुए हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि 12 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। घटनास्थल पर अभी भी सर्च और रेस्क्यू अभियान जारी है।

हादसे के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सुबह घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से राहत और बचाव अभियान की जानकारी ली और आगे की कार्रवाई को लेकर जरूरी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले में जिम्मेदार लोगों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

पुरानी इमारत और बेसमेंट में पानी को बताया वजह

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में बिल्डिंग गिरने की वजह को लेकर कहा कि इमारत काफी पुरानी थी और बेसमेंट में पानी भरने के कारण उसके पिलर प्रभावित हुए। उनके मुताबिक, बिल्डिंग मालिक की लापरवाही के चलते यह स्थिति बनी और इसके बाद पूरी इमारत ढह गई।

उन्होंने बताया कि इस मामले में पहले ही कार्रवाई शुरू की जा चुकी है। भवन मालिक के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी और मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई है।

आसपास की खतरनाक इमारतों पर भी कार्रवाई

सत्य निकेतन की घटना के बाद प्रशासन अब आसपास मौजूद अन्य इमारतों की सुरक्षा की भी जांच करेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि हादसे वाली बिल्डिंग के पीछे स्थित एक अन्य इमारत को खाली करा लिया गया है और उसे तत्काल गिराने की कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही आसपास के पीजी और अन्य भवनों की भी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित इमारतों को सील किया जाएगा।

पांचवीं मंजिल वाले भवनों को सील करने के निर्देश

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली में पांचवीं मंजिल वाले भवनों को तत्काल सील करने के निर्देश दिए हैं। हादसे के बाद भवनों की सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई तेज करने की बात कही गई है।

सरकार का फोकस उन इमारतों की पहचान करने पर भी है, जिन्हें सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक माना जा सकता है।
पब्लिक इस्तेमाल वाली इमारतों का होगा स्ट्रक्चरल ऑडिट

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के साथ मिलकर ऐसी नीति तैयार कर रही है, जिसके तहत सार्वजनिक इस्तेमाल वाली इमारतों का नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट और सेफ्टी सर्टिफिकेशन अनिवार्य किया जाएगा।

इस दायरे में पीजी, नर्सिंग होम, स्कूल और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं वाली इमारतों को शामिल किया जाएगा। निर्धारित सुरक्षा जांच और प्रमाणन के बिना ऐसी जगहों पर सार्वजनिक गतिविधियों की अनुमति नहीं देने की बात कही गई है।

छात्रों के रहने का हॉस्टल में इंतजाम

हादसे के बाद असुरक्षित इमारतों से निकाले गए लोगों के रहने की व्यवस्था भी की गई है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रभावित लोगों के लिए कॉलेज हॉस्टल में रहने का इंतजाम किया गया है और सरकार उनकी जरूरतों का ध्यान रख रही है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि घटना से प्रभावित छात्रों के माता-पिता के संपर्क में सरकार है। उन्हें हर संभव मदद देने की बात कही गई है।

लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई

रेखा गुप्ता ने कहा कि यदि किसी सरकारी अधिकारी की निगरानी में कमी, लापरवाही या किसी अन्य गलती के कारण यह स्थिति बनी है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिम्मेदारी तय करने के बाद संबंधित अधिकारियों को भी नहीं बख्शा जाएगा।

हादसे के बाद जिम्मेदार पाए जाने वाले एमसीडी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, भवन मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के साथ ही आसपास की इमारतों की जांच और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर सीलिंग की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार की ओर से उठाए गए इन कदमों का मुख्य जोर खतरनाक इमारतों की पहचान, सुरक्षा नियमों के पालन और जिम्मेदारी तय करने पर है।