राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसका सीधा असर शहर में प्रवेश करने वाले कमर्शियल वाहनों पर देखने को मिलेगा। अब दिल्ली में डीजल ट्रक और अन्य भारी प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की एंट्री पहले की तुलना में ज्यादा महंगी हो जाएगी। सरकार ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (Environmental Compensation Charge - ECC) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि हर साल अप्रैल महीने में इस शुल्क में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी, ताकि लंबे समय तक इसका प्रभाव बना रहे।
जानें कितनी बढ़ी नई टैक्स दरें
सरकार द्वारा जारी नई दरों के मुताबिक अलग-अलग श्रेणियों के वाहनों पर पॉल्यूशन शुल्क में वृद्धि की गई है:कैटेगरी 2 (लाइट कमर्शियल वाहन): ₹1400 से बढ़ाकर ₹2000
कैटेगरी 3 (2-एक्सल ट्रक): ₹1400 से बढ़ाकर ₹2000
कैटेगरी 4 (3-एक्सल ट्रक): ₹2600 से बढ़ाकर ₹4000
कैटेगरी 5 (4 या अधिक एक्सल वाले भारी ट्रक): ₹2600 से बढ़ाकर ₹4000
इसके अलावा, सरकार ने यह भी प्रावधान किया है कि हर वर्ष अप्रैल में इन सभी दरों पर स्वतः 5% की अतिरिक्त वृद्धि लागू होगी, जिससे यह शुल्क समय के साथ और अधिक प्रभावी हो सके।
आखिर क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?सरकारी अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2015 में लागू किया गया ECC शुल्क अब मौजूदा परिस्थितियों में प्रभावी नहीं रह गया था। पिछले कई वर्षों में महंगाई और ट्रांसपोर्ट गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई, लेकिन टैक्स दरों में अपेक्षाकृत कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया, जिससे इसका असर कमजोर पड़ गया था।
इसी को देखते हुए नई दरों को लागू किया गया है। पर्यावरण मंत्रालय का कहना है कि यह कदम केवल राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या को नियंत्रित करना और दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है।
सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी से मिला समर्थनइस फैसले को सुप्रीम कोर्ट से भी मंजूरी मिल चुकी है। अदालत ने इसे संतुलित और आवश्यक कदम बताते हुए हर साल 5% बढ़ोतरी के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की है कि अनावश्यक भारी वाहनों को दिल्ली में प्रवेश करने से बचना चाहिए और उन्हें वैकल्पिक बाहरी मार्गों या एक्सप्रेसवे का उपयोग करना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से राजधानी में भारी वाहनों की आवाजाही कम होगी, जिससे ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण दोनों में सुधार देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट सेक्टर में धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक और कम प्रदूषण वाले वाहनों को अपनाने की दिशा में भी बदलाव आ सकता है।
सरकार का क्लीन एयर प्लान और आगे की रणनीतिदिल्ली सरकार इस फैसले को अपने व्यापक “क्लीन एयर प्लान” का अहम हिस्सा बता रही है। इस योजना के तहत तकनीक आधारित निगरानी, सख्त नियमों का पालन और जनजागरूकता अभियान के जरिए प्रदूषण को कम करने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि यह टैक्स सीधे आम नागरिकों पर लागू नहीं होता, लेकिन परिवहन लागत बढ़ने की वजह से सामान की कीमतों पर अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले समय में कुछ वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।