दिल्ली में वाहन चालकों के लिए एक अहम और असरदार नियम लागू कर दिया गया है। राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने ईंधन भरवाने के नियमों को सख्त कर दिया है। अब अगर किसी वाहन के पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट नहीं है या वह एक्सपायर हो चुका है, तो उसे पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं मिलेगा। इस फैसले का सीधा असर लाखों वाहन मालिकों पर पड़ने वाला है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि राजधानी के सभी पेट्रोल पंपों पर अब केवल उन्हीं वाहनों को पेट्रोल, डीजल या अन्य ईंधन दिया जाएगा, जिनके पास वैध PUC प्रमाणपत्र होगा। सरकार का उद्देश्य प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नियंत्रण करना और राजधानी की हवा को साफ बनाना है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह कदम जनता के स्वास्थ्य और बेहतर पर्यावरण के लिए जरूरी हो गया था।
पेट्रोल, डीजल और CNG सभी पर लागू होगा नया नियमयह नया नियम केवल पेट्रोल और डीजल वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि CNG वाहनों पर भी समान रूप से लागू होगा। दिल्ली के सभी पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी वाहन को ईंधन तभी दिया जाए जब उसका PUC सर्टिफिकेट वैध हो। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित पंप या एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
वाहन रजिस्ट्रेशन के बाद PUC अनिवार्यकेंद्रीय मोटर वाहन नियमों के अनुसार, किसी भी वाहन के पंजीकरण के एक वर्ष बाद से उसका वैध PUC सर्टिफिकेट रखना अनिवार्य होता है। हालांकि अब तक कई वाहन मालिक इस नियम को गंभीरता से नहीं लेते थे, लेकिन नए आदेश के बाद स्थिति बदल गई है। अब बिना वैध PUC के वाहन को ईंधन नहीं मिलेगा, चाहे वह किसी भी श्रेणी का वाहन क्यों न हो।
पेट्रोल पंप संचालकों को इस आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं और किसी भी तरह की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
GRAP नियमों के तहत लिया गया बड़ा फैसलासरकार ने यह निर्णय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा संशोधित ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दिशानिर्देशों के तहत लिया है। GRAP के नियमों में यह साफ कहा गया है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए PUC नियमों का सख्ती से पालन कराना जरूरी है।
इस कदम को राजधानी की बिगड़ती हवा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।