दिल्ली में इंटरनेशनल हथियार तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, चीन-जर्मनी समेत कई देशों के हाईटेक हथियार बरामद, 10 आरोपी गिरफ्तार

राजधानी दिल्ली में सक्रिय एक बड़े अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बड़ी सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई में 10 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जो एक संगठित मॉड्यूल के तहत काम कर रहे थे। यह पूरा गिरोह पुरानी दिल्ली को अपना ऑपरेशन बेस बनाकर काम कर रहा था और इसके तार पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों से जुड़े पाए गए हैं।

पुलिस की इस कार्रवाई को हाल के समय की सबसे अहम उपलब्धियों में माना जा रहा है, क्योंकि यह नेटवर्क न सिर्फ देश के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये तस्कर लंबे समय से अवैध हथियारों की सप्लाई कर रहे थे और कई आपराधिक गिरोहों से इनके संबंध थे।

विदेशी हाईटेक हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद


क्राइम ब्रांच की छापेमारी के दौरान पुलिस ने 21 अत्याधुनिक विदेशी हथियार और करीब 200 जिंदा कारतूस बरामद किए। बरामद हथियारों की खास बात यह है कि ये दुनिया के अलग-अलग देशों में निर्मित हैं और उच्च तकनीक से लैस हैं।
बरामद हथियारों में शामिल हैं:

चेक रिपब्लिक में बनी सब-मशीन गन (Shadow CZ)
इटली की Beretta पिस्टल
तुर्किये की Stoeger पिस्टल
चीन की PX-3 पिस्टल
ब्राजील की Taurus पिस्टल
जर्मनी की Walther पिस्टल
PX-5.7 जैसी हाई-एंड पिस्टल, जिसका उपयोग स्पेशल फोर्सेस द्वारा किया जाता है

इन हथियारों की गुणवत्ता और क्षमता को देखते हुए यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि इन्हें बड़े आपराधिक और संगठित नेटवर्क के लिए इस्तेमाल किया जाना था।

पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते भारत में एंट्री

जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है कि इन हथियारों की सप्लाई एक तय रूट के जरिए की जाती थी। सबसे पहले ये हथियार पाकिस्तान से नेपाल सीमा तक पहुंचाए जाते थे, जहां से इन्हें भारत में अवैध रूप से प्रवेश कराया जाता था। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर को एक ट्रांजिट और डिस्ट्रीब्यूशन हब के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था।

दिल्ली पहुंचने के बाद इन हथियारों को देश के अलग-अलग राज्यों में सक्रिय अपराधियों और गैंग्स तक पहुंचाया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया को इस तरह अंजाम दिया जाता था कि सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचा जा सके।

जांच में जुटी एजेंसियां

पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और इसके फाइनेंशियल लिंक की भी जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने हथियार देश में सप्लाई किए और किन-किन आपराधिक घटनाओं में इनका इस्तेमाल हुआ।