‘दिल्ली बदहाल, याद आ रहे केजरीवाल’, बीजेपी सरकार के एक साल पर आप का तीखा हमला

नई दिल्ली: राजधानी में बीजेपी सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर आम आदमी पार्टी (आप) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि बीते एक साल में दिल्ली की स्थिति बिगड़ी है और लोग पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal को याद करने लगे हैं।

पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia और दिल्ली आप के प्रदेश संयोजक Saurabh Bharadwaj ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर बीजेपी सरकार को वादाखिलाफी के आरोपों में घेरा। नेताओं का कहना था कि चुनाव से पहले किए गए बड़े-बड़े वादे अब तक धरातल पर नजर नहीं आ रहे हैं।

महिलाओं को आर्थिक सहायता का वादा अधूरा

मनीष सिसोदिया ने कहा कि बीजेपी ने सत्ता में आने से पहले दिल्ली की महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने का आश्वासन दिया था, लेकिन एक साल बीत जाने के बावजूद यह योजना लागू नहीं हो सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने महिलाओं की उम्मीदों के साथ न्याय नहीं किया और घोषणाएं सिर्फ चुनावी मंचों तक सीमित रहीं।

प्रदूषण नियंत्रण पर उठाए सवाल

आप नेताओं ने राजधानी में प्रदूषण की स्थिति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। सिसोदिया का आरोप था कि प्रदूषण कम करने के नाम पर केवल दावे किए गए, जबकि जमीनी स्तर पर ठोस कदम नहीं दिखे। उनका कहना था कि दिल्ली की हवा अब भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।

युवाओं के रोजगार का मुद्दा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिसोदिया ने दावा किया कि लाखों युवाओं के साथ अन्याय हुआ है। उनके मुताबिक, एक लाख से अधिक युवाओं की नौकरियां प्रभावित हुई हैं। उन्होंने बस मार्शलों और मोहल्ला क्लीनिक से जुड़े कर्मचारियों का जिक्र करते हुए कहा कि इन पदों को खत्म कर कई लोगों को बेरोजगार कर दिया गया।

आप का कहना है कि जिन योजनाओं को जनता की भलाई के लिए शुरू किया गया था, उन्हें कमजोर किया जा रहा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े फैसलों का सीधा असर आम लोगों पर पड़ा है।

राजनीतिक माहौल हुआ गरम

बीजेपी सरकार के एक साल पूरे होने के मौके पर जहां सत्तारूढ़ दल अपनी उपलब्धियां गिना रहा है, वहीं विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। आप नेताओं ने कहा कि दिल्ली के लोग पिछले शासनकाल की नीतियों और योजनाओं को याद कर रहे हैं।

राजधानी की सियासत में इस बयानबाज़ी से हलचल बढ़ गई है। आने वाले समय में यह मुद्दा और तेज़ हो सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने दावों और आंकड़ों के साथ जनता के बीच जा रहे हैं।