'सुप्रीम कोर्ट की शर्तें स्वीकार नहीं', CJP का सरकार को दो टूक संदेश, FIR वापस लेने की मांग पर अड़ी

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि वह अदालत की उन शर्तों को स्वीकार नहीं करती, जिनके तहत प्रदर्शन के दौरान दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है। पार्टी का कहना है कि यह फैसला सरकार के साथ हुई बातचीत में दिए गए आश्वासनों से मेल नहीं खाता। CJP का आरोप है कि जंतर-मंतर पर आंदोलन समाप्त कराने के समय सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेने का भरोसा दिया था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह अलग दिखाई दे रही है।

सरकार से हुई बातचीत का हवाला

CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार के साथ हुई वार्ता में स्पष्ट रूप से यह बात सामने आई थी कि आंदोलन के दौरान दर्ज एफआईआर वापस ली जाएंगी। उनका कहना है कि अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश में पहले से दर्ज मामलों की जांच जारी रखने की बात कही गई है, जो उस समझ से अलग है जिसके आधार पर आंदोलन समाप्त किया गया था।

एक इंटरव्यू में दास ने कहा, हमारी सरकार के साथ जो सहमति बनी थी, उसमें एफआईआर वापस लेने का आश्वासन शामिल था। अब यदि कहा जा रहा है कि पहले से दर्ज मामले वापस नहीं होंगे, तो यह हमारी समझ के अनुरूप नहीं है। हमें उम्मीद है कि सरकार अपने वादे का सम्मान करेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के साथ जो शर्तें जुड़ी हैं, वे हमें स्वीकार नहीं हैं।

'सुप्रीम कोर्ट का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए'

सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार को अपने राजनीतिक हितों के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार अदालत के निर्देशों को इस तरह लागू नहीं किया जाना चाहिए कि शांतिपूर्ण और वास्तविक प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया जाए।

उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि देश के सामने सरकार ने जो सार्वजनिक वादा किया था, उसका पालन होना चाहिए। दास ने दोहराया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जानी चाहिए और सरकार को अपने आश्वासन से पीछे नहीं हटना चाहिए।
अपराधियों पर कार्रवाई हो, लेकिन निर्दोषों को न घसीटा जाए

CJP प्रवक्ता ने कहा कि यदि आंदोलन के दौरान किसी व्यक्ति ने वास्तव में अपराध किया है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक अलग से कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि पुलिस को दोषियों के खिलाफ उपलब्ध कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए, लेकिन उसी आधार पर सभी प्रदर्शनकारियों को संदेह के घेरे में नहीं लाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि कोई आरोपी पहले से किसी मामले में शामिल था और खुलेआम घूम रहा था, तो पुलिस को उसके खिलाफ पुराने मामलों में जमानत रद्द कराने जैसी कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन इस स्थिति को आधार बनाकर व्यापक स्तर पर एफआईआर दर्ज करना और बाद में उनका इस्तेमाल वास्तविक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ करना उचित नहीं माना जा सकता।

आंदोलनकारियों के साथ खड़ी रहेगी CJP

सौरव दास ने कहा कि युवा वर्ग इस तरह की कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि CJP आंदोलन में शामिल सभी प्रदर्शनकारियों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए अपना समर्थन जारी रखेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश को CJP की मूल मांगों का विकल्प नहीं माना जा सकता। पार्टी का रुख साफ है कि सरकार को आंदोलन खत्म कराने के दौरान किए गए अपने सभी वादों का पालन करना चाहिए। CJP ने एक बार फिर सरकार से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने और बातचीत के दौरान दिए गए आश्वासनों को पूरी तरह लागू करने की मांग दोहराई।