CBSE की दूसरी बोर्ड परीक्षा में लाखों छात्र होंगे शामिल, बोर्ड ने बताए चौंकाने वाले आंकड़े

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE ने नई शिक्षा नीति के तहत दूसरी बोर्ड परीक्षा को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए हैं। पहली बार लागू किए जा रहे इस सिस्टम के तहत छात्रों को साल में दो बार परीक्षा देने का अवसर दिया जा रहा है, जिससे वे अपने प्रदर्शन में सुधार कर सकें। बोर्ड के मुताबिक, इस बार दूसरी परीक्षा में शामिल होने के लिए लाखों छात्रों ने आवेदन किया है।

बोर्ड द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, सेकेंड बोर्ड एग्जाम के लिए करीब 6.68 लाख विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इनमें 4 लाख से अधिक छात्र (लड़के) और लगभग 2.6 लाख छात्राएं शामिल हैं। यह परीक्षा 15 मई 2026 से शुरू होने जा रही है और इसके लिए विस्तृत डेटशीट भी पहले ही जारी कर दी गई है।

दूसरी परीक्षा को लेकर तेज हुई तैयारी

इससे पहले फरवरी और मार्च 2026 के बीच पहली बोर्ड परीक्षा आयोजित की गई थी। इस बार नए पैटर्न के तहत CBSE ने 10वीं कक्षा का परिणाम अलग से और अपेक्षाकृत कम समय में जारी किया, जो अपने आप में एक नया कदम माना जा रहा है। अब बोर्ड दूसरी परीक्षा के सफल संचालन के लिए पूरी तैयारी में जुट गया है।

सीबीएसई ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों में कितने कंपार्टमेंट श्रेणी के हैं और कितने अपने अंकों में सुधार के उद्देश्य से परीक्षा दे रहे हैं।

अधिकतर छात्र करना चाहते हैं नंबर सुधार


बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, इस बार सेकेंड एग्जाम में शामिल होने वाले लगभग 5.25 लाख छात्र ऐसे हैं, जो अपने पहले के प्रदर्शन को बेहतर बनाना चाहते हैं। वहीं बाकी छात्र वे हैं, जिन्हें कंपार्टमेंट के तहत दोबारा परीक्षा देनी है।

छात्रों को विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और विभिन्न भाषाओं में से अधिकतम तीन विषयों में दोबारा परीक्षा देने का विकल्प दिया गया है। अंतिम मार्कशीट में वही अंक मान्य होंगे, जिनमें छात्र का प्रदर्शन बेहतर रहेगा।
CBSE सेकेंड बोर्ड एग्जाम की डेटशीट

बोर्ड द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार परीक्षाएं इस प्रकार होंगी:

15 मई: गणित (स्टैंडर्ड और बेसिक)
16 मई: अंग्रेजी
18 मई: विज्ञान
19 मई: मुख्य भाषाएं (हिंदी, उर्दू आदि)
20 मई: पेंटिंग, संस्कृत, आईटी, एआई
21 मई: सामाजिक विज्ञान

किन छात्रों को नहीं मिलेगा मौका?

सीबीएसई ने दूसरी परीक्षा के लिए पात्रता नियम भी पहले ही स्पष्ट कर दिए हैं। इसके अनुसार, जो छात्र तीन से अधिक विषयों में अनुत्तीर्ण हुए हैं, वे इस परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। इसके अलावा, जिन्होंने पहली मुख्य परीक्षा में हिस्सा ही नहीं लिया, उन्हें भी दूसरी परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

कुल मिलाकर, नई शिक्षा नीति के तहत शुरू की गई यह व्यवस्था छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखी जा रही है, जिससे वे अपने अंकों में सुधार कर भविष्य की संभावनाओं को और बेहतर बना सकें।