AAP के 7 सांसदों का भाजपा में विलय मंजूर, राज्यसभा में BJP 113 पर पहुंची; उच्च सदन में बड़ा राजनीतिक बदलाव

राजनीतिक गलियारों में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) से अलग होकर राज्यसभा के 7 सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। इस फैसले के बाद राज्यसभा में भाजपा की ताकत ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है और उसके सदस्यों की संख्या बढ़कर 113 हो गई है। यह पहली बार है जब भाजपा ने उच्च सदन में यह आंकड़ा पार किया है।

इस बड़े बदलाव के साथ ही आम आदमी पार्टी को संसद में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उच्च सदन में पार्टी की संख्या 10 से घटकर मात्र 3 रह गई है, जिससे उसके संसदीय प्रभाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि ये सभी सांसद पंजाब से संबंधित हैं और अब वहां पार्टी का प्रतिनिधित्व बेहद सीमित रह गया है। केवल बलबीर सिंह सीचेवाल ही AAP के साथ बने हुए हैं, जबकि अन्य सांसदों ने नेतृत्व और दिशा पर सवाल उठाते हुए पार्टी से अलग होने का फैसला लिया।

राज्यसभा चेयरमैन ने दी औपचारिक मंजूरी

इस पूरे मामले में आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा के सभापति के समक्ष याचिका दायर कर तीन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। पार्टी का कहना था कि तीन सांसदों ने स्पष्ट रूप से पार्टी छोड़ दी है, जबकि चार सांसदों की स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है। AAP ने यह भी दावा किया कि इन सांसदों का रुख दल-बदल कानून के दायरे में आता है।

सोमवार को राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सभी 7 सांसदों के भाजपा में विलय को औपचारिक मंजूरी दे दी, जिसके बाद उच्च सदन की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई। इस फैसले से भाजपा की स्थिति और अधिक मजबूत हो गई है और एक ही झटके में उसके खेमे में 7 सांसदों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कौन-कौन सांसद हुए शामिल

AAP छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों में कई बड़े और चर्चित नाम शामिल हैं। इनमें राघव चड्ढा, पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, राज्यसभा में पार्टी उपनेता अशोक मित्तल, संदीप पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता जैसे नेता शामिल हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा संदीप पाठक के नाम की हो रही है, जिन्हें लंबे समय तक अरविंद केजरीवाल का बेहद करीबी माना जाता रहा है। वह संगठन महासचिव की जिम्मेदारी संभालते हुए पंजाब की राजनीतिक रणनीति में अहम भूमिका निभाते थे। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने दिल्ली में केजरीवाल से मुलाकात कर पंजाब में अपनी उपेक्षा पर नाराजगी भी जताई थी, जिसके बाद उनके पार्टी छोड़ने की प्रक्रिया तेज हो गई।

साहनी का दावा और राजनीतिक बयानबाज़ी

दूसरी ओर, सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने दावा किया है कि 22 अप्रैल को अरविंद केजरीवाल ने उन्हें खुद बैठक के लिए बुलाया था। बातचीत के दौरान केजरीवाल ने उनसे पूछा कि क्या उन पर किसी तरह का दबाव है, जिस पर उन्होंने स्पष्ट रूप से इनकार किया। साहनी के अनुसार, इसके बाद केजरीवाल ने उनसे राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा देने पर विचार करने को कहा, लेकिन उन्होंने इससे सहमति नहीं जताई।

इस पूरे घटनाक्रम ने AAP और भाजपा दोनों के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित किया है और राज्यसभा में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल गया है।