पटना। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इसे राज्य की राजनीति में बदलाव का संकेत बताया है। चुनाव परिणाम आने के बाद उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में देशभर में हुए Gen Z छात्र आंदोलनों से बना माहौल इस चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कम मतदान के कारण यह दावा करना मुश्किल है कि बड़ी संख्या में युवाओं ने मतदान कर सीधे तौर पर उनकी जीत सुनिश्चित की।
Gen Z छात्र आंदोलनों का माहौल बना एक अहम कारकमीडिया से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि देशभर में छात्रों द्वारा किए गए आंदोलनों ने राजनीतिक वातावरण को प्रभावित किया है और संभव है कि उसी का असर बांकीपुर उपचुनाव पर भी दिखाई दिया हो। उन्होंने कहा कि इस सीट पर 35 प्रतिशत से भी कम मतदान हुआ, इसलिए यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि युवाओं की भारी भागीदारी ने चुनाव परिणाम तय किया।
उन्होंने कहा, Gen Z आंदोलनों ने निश्चित रूप से एक माहौल बनाया है और उसका कुछ असर चुनाव पर पड़ा हो सकता है। लेकिन यह साबित करने के लिए कोई ठोस आंकड़ा उपलब्ध नहीं है कि बड़ी संख्या में युवाओं ने मतदान किया। फिलहाल यही वास्तविकता है।
किसी राजनीतिक गठबंधन में शामिल होने से किया इनकारजन सुराज के भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रशांत किशोर ने साफ कहा कि उनकी पार्टी किसी भी राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी। उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र गठबंधन बिहार की जनता के साथ है।
उन्होंने कहा, बांकीपुर के मतदाताओं ने पारंपरिक राजनीतिक दलों को छोड़कर जन सुराज पर भरोसा जताया है। हम जनता के भरोसे को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं और किसी राजनीतिक गठबंधन में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता।
विभिन्न दलों के समर्थकों ने भी दिया साथप्रशांत किशोर ने अपनी जीत के लिए केवल जन सुराज के कार्यकर्ताओं को ही नहीं, बल्कि अन्य दलों के उन समर्थकों का भी आभार जताया जिन्होंने चुनाव में उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भाजपा, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कई ऐसे कार्यकर्ता और समर्थक थे जो अपनी-अपनी पार्टियों की मौजूदा स्थिति से असंतुष्ट थे और उन्होंने जन सुराज के पक्ष में मतदान किया।
उन्होंने कहा कि यह समर्थन किसी एक दल का नहीं बल्कि बदलाव चाहने वाले लोगों का था, जिन्होंने स्थापित राजनीति से अलग विकल्प को चुना।
परिणाम को सरकार के खिलाफ जनादेश बतायाप्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों को बिहार सरकार के खिलाफ जनता का संदेश बताया। उन्होंने कहा कि यह जनादेश मुख्य रूप से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व के प्रति लोगों की नाराजगी को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, मेरी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है, लेकिन बिहार के पढ़े-लिखे लोगों का एक बड़ा वर्ग उनके खिलाफ राय रखता है। इसकी वजह उनके खिलाफ रहे आपराधिक मामलों की पृष्ठभूमि और प्रशासनिक क्षमता को लेकर उठने वाले सवाल हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के लिए भी बताया राजनीतिक संदेशप्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर का चुनाव परिणाम भाजपा नेतृत्व के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत है। उनका मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस जनादेश से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री का चयन जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किया गया है, तो उसी समाज से किसी साफ-सुथरी छवि और बेहतर प्रशासनिक क्षमता वाले नेता को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
विपक्ष ने भी नतीजों को छात्र आंदोलनों से जोड़ाबांकीपुर उपचुनाव के परिणाम पर इंडिया गठबंधन के नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी। सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने इसे भाजपा के खिलाफ स्पष्ट जनादेश बताया। उन्होंने कहा कि हाल के छात्र आंदोलनों और जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के बाद जनता के मूड में बदलाव दिखाई दे रहा है, जिसकी झलक इस चुनाव में देखने को मिली।
वहीं कांग्रेस प्रवक्ता सुमन कुमार मलिक ने कहा कि बांकीपुर की जनता ने अपने मतदान के जरिए सत्ता के अहंकार और तानाशाही की राजनीति के खिलाफ स्पष्ट संदेश दिया है। उनके अनुसार यह परिणाम लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता की आवाज को मजबूत करने वाला है।
गौरतलब है कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 19 हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया। यह सीट वर्ष 1995 से भाजपा के कब्जे में थी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उनके विधानसभा से इस्तीफा देने के कारण इस सीट पर उपचुनाव कराया गया।