बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) में बड़े बदलाव के संकेत मिलते ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष सूरजभान सिंह ने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। खबर है कि वे जल्द ही लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में शामिल हो सकते हैं।
पार्टी से नाराज सूरजभान बोले – लोकतंत्र हो गया खत्मसूरजभान सिंह ने इस्तीफा देते हुए कहा कि अब रालोजपा में “आंतरिक लोकतंत्र पूरी तरह खत्म” हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में केवल एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं और कार्यकर्ताओं की बात को कोई महत्व नहीं दिया जा रहा। उनका यह कदम उस समय आया है जब पार्टी अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए तीसरा मोर्चा बनाने की घोषणा की है।
तीसरा मोर्चा बनाकर चुनाव लड़ेगी रालोजपापटना में बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पशुपति पारस ने ऐलान किया कि रालोजपा अब किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं होगी, बल्कि “तीसरे मोर्चे” के तहत समान विचारधारा वाले अन्य दलों के साथ मिलकर राज्य की 243 सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ेगी। उन्होंने बताया कि महागठबंधन की ओर से उन्हें केवल चार सीटों का प्रस्ताव मिला था, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया। पारस ने कहा, “हम सम्मान के साथ राजनीति करते हैं, और सम्मान के साथ चुनाव लड़ेंगे।”
पारस और चिराग पासवान आमने-सामनेकुछ दिन पहले ही पारस ने यह भी कहा था कि जहां-जहां उनके भतीजे चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) उम्मीदवार उतारेगी, रालोजपा वहां अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी। गौरतलब है कि पशुपति पारस ने अपने भाई रामविलास पासवान की बनाई पार्टी में विभाजन कर अलग होकर रालोजपा का गठन किया था। उनके इस कदम के बाद से ही चाचा-भतीजे के बीच राजनीतिक मतभेद जारी हैं।
सूरजभान सिंह का नया राजनीतिक सफरसूरजभान सिंह के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वे अब राजद का दामन थाम सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, उनकी पत्नी वीणा देवी, जो स्वयं पूर्व सांसद रह चुकी हैं, मोकामा विधानसभा सीट से राजद उम्मीदवार के रूप में अनंत सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ सकती हैं। सूरजभान सिंह का परिवार बिहार की राजनीति में काफी प्रभावशाली माना जाता है — उनके भाई चंदन सिंह भी पूर्व सांसद रह चुके हैं।
रालोजपा में बढ़ी उथल-पुथलसूरजभान सिंह के इस्तीफे के बाद रालोजपा में असंतोष और गहराने की संभावना है। पार्टी के कई नेता अब नेतृत्व पर सवाल उठाने लगे हैं। वहीं, पशुपति पारस का “तीसरा मोर्चा” कितना मजबूत साबित होगा, यह आने वाला चुनाव तय करेगा।