बिहार विधानसभा चुनाव: नीतीश कुमार की पकड़ ढीली! रिकॉर्ड बढ़त के साथ क्या BJP करेगी सीएम पद पर कब्ज़ा?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों ने प्रदेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। इस बार पहली बार ऐसा हुआ है कि भारतीय जनता पार्टी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है। दिलचस्प यह भी है कि बीजेपी एक बार फिर 91 सीटों के आंकड़े को छूती दिख रही है, जो इससे पहले केवल 2010 में देखने को मिला था। दूसरी ओर, नीतीश कुमार की जेडीयू लगभग 82 सीटों पर आगे चल रही है और दूसरे स्थान पर है।

अब सबसे बड़ा सवाल—सीएम कौन बनेगा?

चुनाव प्रचार के दौरान एनडीए की ओर से कई बार कहा गया कि गठबंधन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहा है, लेकिन कहीं भी नीतीश कुमार को औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं किया गया।

अब जब बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, तो यह स्वाभाविक सवाल उठ रहा है कि— क्या बीजेपी अब अपना सीएम उम्मीदवार सामने रखेगी? और क्या जेडीयू को इस बार सत्ता में दूसरा दर्जा स्वीकार करना पड़ेगा?

गठबंधन का गणित: बीजेपी के पास भी सरकार बनाने के विकल्प

यदि सीटों की जुगत देखें तो यह बात साफ है कि बीजेपी के पास सरकार बनाने के कई रास्ते हैं। जेडीयू की आवश्यकता कम होती दिख रही है, जिससे नीतीश कुमार की बर्गेनिंग पावर पर सीधा असर पड़ सकता है।

एनडीए के सहयोगी दलों की स्थिति इस प्रकार है—

एलजेपी (आर) — 20 सीटें

हम (HAM) — 5 सीटें

आरएलएम (RLAM) — 4 सीटें

इन दलों को बीजेपी के साथ जोड़ दिया जाए तो गठबंधन का आंकड़ा 121 सीटों तक पहुंच जाता है। यह जेडीयू के बिना भी सरकार बनाने की स्थिति के बहुत करीब है। ध्यान देने की बात यह भी है कि ये तीनों नेता—चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा—अतीत में कई बार नीतीश कुमार से राजनीतिक टकराव में रहे हैं। ऐसे में समीकरण और भी रोचक हो जाते हैं।

बहुमत का आंकड़ा और वर्तमान स्थिति

बिहार में पूर्ण बहुमत के लिए 122 सीटों की आवश्यकता है। शुरुआती रुझानों के अनुसार, एक सीट बीएसपी के खाते में जाती दिखाई दे रही है।
दोपहर 2 बजे तक यही समीकरण बना हुआ था और यह स्थिति नीतीश कुमार के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

हालांकि केंद्र की राजनीति में नीतीश कुमार एनडीए के लिए एक महत्वपूर्ण सहयोगी हैं और मोदी सरकार को उनका समर्थन प्राप्त है। यह कारक बीजेपी के सीएम चेहरे के निर्णय को प्रभावित भी कर सकता है।

बीजेपी की पोज़िशन—ऐतिहासिक ग्राफ को देखें तो यह बड़ा मौका

यदि बीजेपी के पिछले प्रदर्शन पर नज़र डालें—

2010: 91 सीटें

2015: 53 सीटें

2020: 74 सीटें

2020 में आरजेडी 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी और बीजेपी दूसरे नंबर पर रही थी, जबकि जेडीयू तीसरे नंबर पर खिसक गई थी। लेकिन इस बार मामला बिल्कुल उलट है। बीजेपी शीर्ष पर है और जेडीयू उससे काफी पीछे।

क्या बदलेगा बिहार की सत्ता का चेहरा?

स्थिति साफ संकेत दे रही है कि नीतीश कुमार की राजनीतिक पकड़ पहले जैसी मजबूत नहीं रही। बीजेपी अब पहले से कहीं अधिक सक्षम और निर्णायक स्थिति में है। इस बार मुख्यमंत्री पद को लेकर गठबंधन के भीतर खींचतान देखी जा सकती है और यह तय करेगा कि बिहार की बागडोर किसके हाथ में आएगी।