बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक ऐसे नाम की चर्चा हर तरफ है, जिसे अब तक प्रशासनिक फैसलों में देखा जाता रहा—वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार राय। अब उनके राजनीति में आने की अटकलें ज़ोर पकड़ रही हैं। नीतीश सरकार ने उनके ऐच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के आवेदन को मंज़ूरी दे दी है। सोमवार को सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से इस बाबत अधिसूचना भी जारी कर दी गई। अब जब दिनेश राय ने वर्षों की नौकरशाही के बाद कलम को अलविदा कहा है, तो लोग यह पूछने लगे हैं—क्या अब वह सियासत की ज़मीन पर उतरेंगे?
रोहतास जिले से ताल्लुक रखने वाले दिनेश राय को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे करीबी अधिकारियों में गिना जाता रहा है। यही वजह है कि चर्चा है कि वह अब जदयू के बैनर तले राजनीति में कदम रख सकते हैं।
VRS लेने से पहले वे राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव पद पर तैनात थे। हाल ही में उनका प्रमोशन भी हुआ था, लेकिन उसके बाद अचानक वीआरएस के लिए आवेदन कर देना, राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर गया। इससे पहले वे पश्चिम चंपारण के डीएम भी रह चुके हैं और नीतीश कुमार के आप्त सचिव के तौर पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली है।
आईएएस बनने से पहले वे बिहार प्रशासनिक सेवा (बिप्रसे) के अधिकारी थे। साल 2010 में उनका प्रमोशन आईएएस कैडर में हुआ था।
पिछले महीने जब वे सचिव पद पर नियुक्त होने के बाद पहली बार अपने गृह जिला रोहतास पहुंचे थे, तो उनका स्वागत किसी जननेता की तरह हुआ। करगहर में जगह-जगह स्वागत द्वार, फूलमालाएं और जयकारों की गूंज... यह सब उनके राजनीतिक भविष्य की ओर इशारा कर रहा था। उनके काफिले में एक हजार से अधिक गाड़ियों के शामिल होने का दावा किया गया था। इसके बाद से ही उनके राजनीति में आने के कयास लगने लगे थे।
फिलहाल पूर्व आईएएस दिनेश राय ने अपने अगले कदम को लेकर चुप्पी साध रखी है, लेकिन वह हमेशा से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीतियों की तारीफ करते रहे हैं। ऐसे में संभावना है कि जेडीयू उन्हें अपने पाले में लेकर चुनावी रण में उतार सकती है।
बताया जा रहा है कि वे अपने गृह विधानसभा क्षेत्र करगहर से चुनाव लड़ सकते हैं, जहां वे पहले बीडीओ भी रह चुके हैं। वहीं, पश्चिम चंपारण की किसी सीट से भी उन्हें टिकट मिलने की संभावना है, जहां वे बतौर डीएम काफी लोकप्रिय रहे हैं।
गौरतलब है कि नीतीश कुमार पूर्व में भी कई नौकरशाहों को राजनीति में मौका दे चुके हैं—जैसे कि आरसीपी सिंह और मनीष वर्मा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दिनेश राय भी उसी रास्ते पर आगे बढ़ते हैं। जनता और राजनीतिक गलियारे दोनों अब उनकी अगली चाल का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।