बिहार में मतदाता सूची का पहला मसौदा जारी, दोपहर 3 बजे से निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध

पटना। बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के उपरांत मतदाता सूची का पहला संशोधित मसौदा शुक्रवार को जारी कर दिया है। राज्य के सभी 38 जिलों में जिलाधिकारियों ने 243 विधानसभा क्षेत्रों के लिए तैयार इस प्रारूप को गुरुवार को ही मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ साझा करना शुरू कर दिया था।

इस प्रारूप को आम जनता के अवलोकन हेतु 1 अगस्त दोपहर 3 बजे से निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य पारदर्शिता को बढ़ावा देना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से वंचित न रह जाए।

राजनीतिक दलों के साथ संवाद और सुझाव

निर्वाचन विभाग ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें करें और मसौदा सूची पर चर्चा कर उनकी राय और सुझाव लें। यह संवादात्मक प्रक्रिया न केवल भरोसे को बढ़ाती है, बल्कि चुनाव व्यवस्था को अधिक सहभागी और उत्तरदायी बनाती है।

आगे की प्रक्रिया और सुविधा केंद्र

प्रारूप जारी होने के बाद आयोग एक विस्तृत प्रेस नोट भी जारी करेगा, जिसमें अगले चरण की प्रक्रिया और समय-सीमा की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही राज्यभर में हेल्पलाइन नंबर और सहायता केंद्र भी सक्रिय कर दिए गए हैं, ताकि मतदाताओं को किसी प्रकार की कठिनाई न हो।

पिछले कुछ महीनों में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता जागरूकता अभियान भी तेजी से चलाया गया। गांवों से लेकर शहरों तक विशेष शिविरों के माध्यम से लोगों को मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या सुधारने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। इससे लोगों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त का संदेश

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने गुरुवार को जानकारी देते हुए कहा कि बिहार की मसौदा मतदाता सूची आज (1 अगस्त) को जारी की जा रही है, जिसे कोई भी नागरिक आयोग की वेबसाइट पर जाकर देख सकता है। उन्होंने कहा कि 1 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक सभी मतदाता, राजनीतिक दल या संबंधित व्यक्ति मसौदा सूची में नाम जोड़ने, हटाने या सुधार से संबंधित दावे और आपत्तियां दर्ज कर सकेंगे।

यह कदम न सिर्फ निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की दिशा में है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि राज्य का हर पात्र नागरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले सके।