बिहार में शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब की तस्करी का सिलसिला थम नहीं रहा है। कैमूर जिले के मोहनिया चेकपोस्ट पर उत्पाद विभाग की टीम ने एक 14 चक्का ट्रक से विदेशी शराब की बड़ी खेप पकड़ी है। अधिकारियों के मुताबिक, ट्रक में शराब को छिपाने के लिए खास तरीके से गुप्त तहखाना बनाया गया था। बरामद शराब की अनुमानित कीमत करीब 72 से 75 लाख रुपये बताई जा रही है।
indiatv की खबर के अनुसार, कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई। उत्पाद विभाग की टीम को जानकारी मिली थी कि पंजाब से एक ट्रक के जरिए बड़ी मात्रा में शराब बिहार लाई जा रही है। सूचना मिलने के बाद टीम ने संदिग्ध वाहन पर नजर रखी और दुर्गावती से ही उसका पीछा करना शुरू कर दिया। बाद में मोहनिया चेकपोस्ट पर ट्रक को रोककर उसकी जांच की गई।
ट्रक के अंदर बनाया गया था गुप्त तहखानाजांच के दौरान अधिकारियों को ट्रक के भीतर शराब छिपाने के लिए बनाए गए एक गुप्त तहखाने का पता चला। बताया गया कि इस हिस्से को इस तरह तैयार किया गया था कि सामान्य जांच में शराब आसानी से नजर न आए। तहखाने के आसपास जैविक खाद यानी गोबर से भरे बोरे रखे गए थे।
उत्पाद विभाग के चेकपोस्ट प्रभारी संतोष कुमार के अनुसार, तहखाने की तलाशी लेने पर 550 पेटी विदेशी शराब बरामद हुई। बरामद शराब की कुल मात्रा करीब 4,815 लीटर बताई गई है। विभाग ने इसकी बाजार कीमत लगभग 72 से 75 लाख रुपये आंकी है।
पंजाब से बिहार पहुंचाई जा रही थी खेपप्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शराब की यह खेप पंजाब से बिहार लाई जा रही थी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास और नितेश कुमार के रूप में हुई है। दोनों हरियाणा के रहने वाले बताए गए हैं।
पूछताछ में आरोपी विकास ने बताया कि उसने ट्रक कानपुर से लिया था और उसे पटना पहुंचाना था। इसके लिए उसे 50 हजार रुपये दिए जाने की बात तय हुई थी। हालांकि, शराब की खेप के पीछे शामिल मुख्य कारोबारियों तक पहुंचने के लिए जांच जारी है।
मुख्य तस्करों की तलाश में जुटी टीमउत्पाद विभाग के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर शराब के मुख्य कारोबारियों के नाम और उनके पते की जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई से यह भी सामने आया है कि शराब की तस्करी के लिए ट्रक के भीतर छिपे हिस्से का इस्तेमाल किया जा रहा था। फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस खेप को बिहार में कहां और किसे पहुंचाया जाना था।