ममता बनर्जी ने CJP के आंदोलन को दिया समर्थन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने समर्थन दिया है। शुक्रवार को दिल्ली से लौटने के बाद कोलकाता एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में ममता बनर्जी ने कहा कि वह CJP, युवाओं और छात्रों के आंदोलन के साथ खड़ी हैं। उन्होंने कथित ज्यादतियों को रोकने की अपील भी की।

ममता बनर्जी से दिल्ली और मुंबई में CJP की ओर से किए जा रहे प्रदर्शनों के बारे में सवाल किया गया था। इन प्रदर्शनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जा रही है। CJP ने अब घोषणा की है कि अगर ज्ञानेश कुमार पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन किया जाएगा। CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन के बाद यह ऐलान किया।

ममता के अलावा AAP और शिवसेना ने भी जताया समर्थन

CJP के आंदोलन को लेकर ममता बनर्जी के समर्थन के अलावा आम आदमी पार्टी और शिवसेना की ओर से भी समर्थन का जिक्र किया गया है। ममता बनर्जी इससे पहले अगस्त में दिल्ली में NEET मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर CJP के प्रदर्शन के समर्थन की बात कह चुकी हैं।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मौजूदा आंदोलन का केंद्र मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर उठाए जा रहे सवाल हैं। CJP इसी मुद्दे को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पहुंचने का ऐलान

मुंबई के शिवाजी पार्क में शुक्रवार को हुए प्रदर्शन के बाद अभिजीत दिपके ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी इस कार्यक्रम की घोषणा की।

दिपके ने आंदोलन को शांतिपूर्ण बताते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग करने वाले लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि आंदोलन महात्मा गांधी के बताए रास्ते पर चलेगा। दिपके ने यह भी कहा कि अब सरकार और दिल्ली पुलिस पर निर्भर है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान किया जाता है या 20 जुलाई को हुई कथित कार्रवाई जैसी स्थिति दोहराई जाती है।

प्रदर्शन के दौरान दिपके ने 'चलो दिल्ली' का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो देशभर से Gen Z युवा दिल्ली पहुंचेंगे। उन्होंने प्रस्तावित कार्यक्रम को 'जंतर-मंतर 2.0' नाम दिया।

CJP की प्रमुख मांगों में क्या शामिल है?


CJP की मुख्य मांग ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। संगठन ने उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग भी रखी है। इसके अलावा 2025 की मतदाता सूचियों को फ्रीज करने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को खत्म करने की मांग भी संगठन की ओर से की गई है।

इन मांगों के पीछे CJP का मुख्य आरोप मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। संगठन के नेताओं का दावा है कि कई राज्यों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और कुछ नए नाम जोड़े गए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दिपके ने मतदाता सूची को लेकर लगाए कई आरोप

CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने दावा किया कि दो वर्षों में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की मतदाता सूची में 40 लाख नए मतदाता जोड़े गए।

दिपके ने दिल्ली, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभा सीटों को लेकर भी मतदाता नामों में बदलाव के दावे किए। उनके मुताबिक, दिल्ली में आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल की विधानसभा सीट पर 40 हजार मतदाताओं के नाम हटाए गए और बाद में केजरीवाल करीब चार हजार वोटों के अंतर से चुनाव हार गए।

तमिलनाडु को लेकर दिपके ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की विधानसभा सीट से करीब एक लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विधानसभा सीट से भी मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया।

CJP ने इन कथित मतदाता नाम कटौतियों को चुनाव परिणामों से जोड़ते हुए आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में किए गए बदलावों से सत्तारूढ़ बीजेपी को फायदा हुआ। हालांकि, संगठन की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

आंदोलन को चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों से जोड़ रहा CJP


CJP के मुताबिक, मतदाता सूचियों में कथित बदलाव और चुनाव आयुक्त की भूमिका से जुड़े सवाल उसके आंदोलन के प्रमुख आधार हैं। संगठन इन्हीं मुद्दों को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और अन्य मांगों पर जोर दे रहा है।

मुंबई के प्रदर्शन के बाद 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर दिपके ने देशभर के समर्थकों से पहुंचने की अपील की है। उन्होंने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन बताते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग करने वाले नागरिकों को इसमें शामिल होने का आह्वान किया है।