बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा राजनीतिक बयान देकर सियासी माहौल गरमा दिया है। उन्होंने दावा किया कि इस बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) राज्य में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगा।
शाह की भविष्यवाणी — 160 से अधिक सीटें NDA के खाते मेंअमित शाह ने कहा कि बिहार में एनडीए बेहद मजबूत स्थिति में है और मतदाताओं का रुझान स्पष्ट रूप से गठबंधन के पक्ष में दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, “हम 160 से ज्यादा सीटें जीतेंगे और दो-तिहाई बहुमत से सरकार बनाएंगे।”
इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में शाह ने यह भी जोड़ा कि इस चुनाव में जनता विकास, सुशासन और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि बिहार ने 15 साल पहले जंगलराज से मुक्ति पाई थी, और अब वह फिर से अराजकता के दौर में लौटना नहीं चाहता।
BJP-JDU गठबंधन को लेकर विश्वास जतायाअमित शाह ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के गठबंधन की एकजुटता पर भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि दोनों दल समान रूप से बेहतर प्रदर्शन करेंगे और सीटों की स्ट्राइक रेट लगभग बराबर रहेगी। “एनडीए के भीतर कोई मतभेद नहीं है, हम एकजुट हैं और जनता का भरोसा हमारे साथ है,” शाह ने कहा।
लालू यादव और RJD पर तीखा हमलाअमित शाह ने इस दौरान राजद (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव केवल नाम के नेता हैं, जबकि पार्टी की असली कमान अब भी लालू यादव के पास है। “आज भी आरजेडी में टिकट लालू यादव ही बांटते हैं। तेजस्वी केवल नाम के नेता हैं। पार्टी अब भी लाठी और बाहुबल की राजनीति पर टिकी है,” शाह ने कहा।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरजेडी सत्ता में लौटी, तो बिहार फिर से “जंगलराज” के पुराने दौर में फिसल जाएगा।
“बीते 20 सालों में बिहार में शांति और विकास इसलिए रहा क्योंकि आरजेडी सत्ता से बाहर रही। अगर वे लौटे, तो अराजकता और हिंसा की राजनीति फिर हावी हो जाएगी,” उन्होंने कहा।
जनता का मूड एनडीए के पक्ष में — शाह का दावाअमित शाह का कहना है कि जनता अब जाति और भावनाओं से ऊपर उठकर स्थिर सरकार चाहती है। उनके मुताबिक, एनडीए के काम — सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग के क्षेत्र में सुधार — जनता के बीच भरोसे का कारण बने हैं। शाह ने कहा कि बिहार ने अब विकास की रफ्तार पकड़ ली है, और एनडीए इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि जनता “डर और अस्थिरता की राजनीति” से दूर रहकर सुशासन को चुनेगी।