असम विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं और इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। पार्टी ने एक साथ 88 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। बताया जा रहा है कि इन नामों पर अंतिम मुहर हाल ही में हुई केंद्रीय चुनाव समिति की अहम बैठक में लगी, जिसके बाद सूची सार्वजनिक की गई।
इस महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी रही। इसमें प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, रक्षा मंत्री सहित संगठन के बड़े नेताओं ने भाग लिया और उम्मीदवारों के चयन पर विस्तृत चर्चा की गई। इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों के समीकरणों और जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों को टिकट दिया गया।
पार्टी द्वारा घोषित सूची में कई क्षेत्रों से प्रमुख चेहरों को मैदान में उतारा गया है। गोलकगंज से अश्विनी राय सरकार, धुबरी से उत्तम प्रसाद, बिरसिंग जरूआ से माधवी दास, गोलपारा पश्चिम से पबित्र राभा और दुधनई से टंकेश्वर राभा को उम्मीदवार बनाया गया है। इसके अलावा अभयपुरी से भूपेन रॉय, बिजनी से अरूप कुमार डे, भवानीपुर-सोरभोग से रंजीत कुमार दास, मंडिया से बादल चंद्र आर्य, चमरिया से ज्योत्स्ना कलिता और बोको-चायगांव से राजू मेच को भी टिकट मिला है।
गुवाहाटी और आसपास के क्षेत्रों में भी पार्टी ने अपने मजबूत उम्मीदवारों को उतारा है। पलासबारी से हिमांशु शेखर बैश्य, रंगिया से भबेश कलिता, कमलपुर से दिगंत कलिता और दिसपुर से प्रद्युत बोरदोलोई को मैदान में उतारा गया है। नई गुवाहाटी से दिप्लु रंजन सरमा और गुवाहाटी सेंट्रल से विजय कुमार गुप्ता को टिकट दिया गया है।
सबसे अहम बात यह है कि राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा को जालुकबारी सीट से उम्मीदवार बनाया गया है, जिससे इस सीट पर मुकाबला और भी दिलचस्प होने की उम्मीद है। इसके अलावा बरखेत्री से नारायण डेका, नलबाड़ी से जयंत मल्ल बरुआ, तिहू से चंद्रमोहन पाटोवारी, तामुलपुर से बिस्वजीत देइमारी, गोरेस्वर से विक्टर कुमार दास, टांगला से बिकन चंद्र डेका और सिपाझार से डॉ. परमानंद राजबंशी को भी पार्टी ने मौका दिया है।
इस सूची के जारी होने के बाद असम की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि बीजेपी ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन किया है, ताकि चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके। अब सभी की नजरें आने वाले दिनों में विपक्षी दलों की रणनीति और बाकी उम्मीदवारों की घोषणा पर टिकी हुई हैं।