अमरावती। आंध्र प्रदेश में एक बार फिर भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें राजनीति, सिनेमा और कालेधन का त्रिकोणीय गठजोड़ उजागर हुआ है। राज्य के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम (SIT) ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया है कि किस तरह YSR कांग्रेस पार्टी से जुड़े प्रभावशाली लोगों ने टॉलीवुड फिल्मों को माध्यम बनाकर काले धन को सफेद किया।
ED Entertainments बना कालाधन की मशीनSIT की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे घोटाले के केंद्र में है ‘ईडी एंटरटेनमेंट्स’ नामक एक प्रोडक्शन कंपनी, जिसकी स्थापना घोटाले के मुख्य आरोपी राज केसी रेड्डी ने की थी। इस कंपनी ने अभिनेता सुमंत की ‘मल्ली मोडालैंडी’ और निखिल सिद्धार्थ की ‘स्पाई’ जैसी फिल्में बनाई, जो बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रहीं, लेकिन इनका इस्तेमाल करोड़ों के कालाधन को वैध बनाने में हुआ।
कंपनी ने उत्पादन लागत के नाम पर केवल 12 करोड़ रुपये दर्शाए, लेकिन SIT को जांच में पता चला कि इन फिल्मों पर कुल 40 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिसमें से 28 करोड़ नकद में दिए गए, और यह पूरी राशि शराब व्यापार से जुटाई गई थी।
फर्जी लोन और संदिग्ध ट्रांसफर से खुला राजएसआईटी ने पाया कि शराब सप्लायर्स और ठेकों से निकला कालाधन बिचौलियों के जरिये ईडी एंटरटेनमेंट्स के खाते में 'लोन' के रूप में पहुंचाया गया। एक प्रमुख खुलासा यह रहा कि एक अखिल भारतीय फिल्म स्टार की पत्नी ने कंपनी को एक करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, जो कभी वापस नहीं हुआ, जिससे इस ट्रांजैक्शन की मंशा पर सवाल खड़े हो गए।
फ्लॉप फिल्में बनीं मुनाफे का जरियाभले ही ‘स्पाई’ और ‘मल्ली मोडालैंडी’ बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलीं, लेकिन इन फिल्मों के ओटीटी और डिजिटल अधिकार बेचकर आरोपियों ने 36 करोड़ रुपये हासिल किए। SIT का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया के जरिए कालेधन को सफेद करने की साजिश रची गई और अधिकांश अवैध रकम को ‘कानूनी आमदनी’ का जामा पहना दिया गया।
10 करोड़ की फीस, दिखाया सिर्फ 90 लाखजांच में यह भी सामने आया कि ‘स्पाई’ में अभिनय करने वाले निखिल सिद्धार्थ को 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि कंपनी के रिकॉर्ड में उन्हें केवल 90 लाख रुपये का भुगतान दिखाया गया। इतना ही नहीं, फिल्म की शूटिंग जॉर्डन में हुई, लेकिन वहां के खर्चों का कोई दस्तावेजी सबूत नहीं मिला, जिससे SIT का यह आरोप मजबूत होता है कि शूटिंग एक बहाना भर थी, असली मकसद बेहिसाब नकदी का इस्तेमाल करना था।
राजनीति से गहरा नाता, सत्ता में रहते हुए हुई शुरुआतइस फिल्म कंपनी का पंजीकरण 12 दिसंबर 2020 को हुआ, जब जगन मोहन रेड्डी की सरकार सत्ता में थी। ‘मल्ली मोडालैंडी’ 2022 में और ‘स्पाई’ 2023 में पांच भाषाओं में रिलीज हुई। इस दौरान अन्य फिल्मों के लिए भी एडवांस पेमेंट और प्री-प्रोडक्शन कार्य शुरू किया गया, लेकिन हालिया विधानसभा चुनावों में YSRCP की हार के बाद फिल्म निर्माण गतिविधियां अचानक बंद हो गईं।
मुख्य आरोपी और आगे की कार्रवाईSIT ने ईडी एंटरटेनमेंट्स के पूर्व CEO उप्पलपति चरण तेज से पूछताछ की है, जिन्होंने कथित तौर पर नकद लेन-देन, फर्जी अकाउंटिंग और फिल्म अधिकारों की बिक्री में सक्रिय भूमिका निभाई। सूत्रों के अनुसार, SIT जल्द ही इस मामले में अदालत में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने वाली है, जिससे शराब घोटाले का यह नया सिरा एक बड़ा राजनीतिक और कानूनी तूफान ला सकता है।
यह मामला सिर्फ शराब घोटाले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह साफ दिख रहा है कि कैसे राजनीतिक संरक्षण में फिल्म उद्योग को मोहरा बनाकर कालेधन को सफेद करने की योजना बनाई गई। एसआईटी की यह रिपोर्ट ना केवल आंध्र प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला सकती है, बल्कि टॉलीवुड की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।