केंद्र सरकार ने हाल ही में जीएसटी नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जिनका सीधा असर इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) पर देखने को मिलेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया कि अब चार स्लैब में से सिर्फ दो स्लैब, 5 और 18 प्रतिशत को जारी रखा जाएगा, जबकि 12 और 28 प्रतिशत के स्लैब को समाप्त कर दिया गया है। इसके साथ ही एक नया विशेष कर स्लैब 40 प्रतिशत का भी लागू किया गया है, जिसके दायरे में महंगी कारें, तंबाकू उत्पाद, सिगरेट, कैसीनो, घुड़दौड़, ऑनलाइन गेमिंग और खेल आयोजनों को शामिल किया गया है। इसी श्रेणी में अब आईपीएल को भी रखा गया है।
नए नियमों के तहत पहले जहां आईपीएल पर 28 प्रतिशत कर लगता था, वहीं अब 40 प्रतिशत कर लगाया जाएगा। इससे टिकट की कीमतों में सीधी बढ़ोतरी होगी। उदाहरण के तौर पर, पहले 1000 रुपये के टिकट पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाकर कुल कीमत 1280 रुपये होती थी, लेकिन अब यही टिकट 1400 रुपये का मिलेगा। यानी प्रति 1000 रुपये पर दर्शकों को 120 रुपये ज्यादा खर्च करने होंगे। इसी तरह 500 रुपये का टिकट पहले 640 रुपये का पड़ता था, अब वही 700 रुपये में मिलेगा, जबकि 2000 रुपये का टिकट 2800 रुपये तक पहुंच जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव से कई चीजें सस्ती हुई हैं, लेकिन प्रीमियम खेल आयोजनों पर इसका विपरीत असर पड़ा है। दर्शकों का मानना है कि इस फैसले से आम क्रिकेट प्रेमियों पर बोझ बढ़ेगा और स्टेडियम जाकर लाइव मैच देखने की संभावना और महंगी हो जाएगी। प्रशंसक सोशल मीडिया पर अपनी चिंता जता रहे हैं और यह मांग कर रहे हैं कि बीसीसीआई और फ्रेंचाइजी इस पर ध्यान दें और दर्शकों के हित में कोई कदम उठाएं।
हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) और इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) जैसी अन्य प्रमुख लीग भी 40 प्रतिशत कर के दायरे में आएंगी या नहीं। लेकिन यह तय है कि आईपीएल का सीधा असर टिकट खरीदने वाले दर्शकों पर पड़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों के टिकटों को लेकर सरकार ने साफ किया है कि उन पर यह नया 40 प्रतिशत स्लैब लागू नहीं होगा। यदि टिकट की कीमत 500 रुपये से कम है तो उस पर कोई कर नहीं लगेगा और 500 रुपये से अधिक होने पर मौजूदा 18 प्रतिशत की दर ही लागू होगी। इसका मतलब यह है कि टीम इंडिया के अंतरराष्ट्रीय मैच और अन्य देशों के साथ खेले जाने वाले मुकाबले पहले की तरह ही 18 प्रतिशत जीएसटी स्लैब में बने रहेंगे।
ऑनलाइन बुकिंग शुल्क और स्टेडियम शुल्क को मिलाकर यह बोझ और बढ़ सकता है। ऐसे में दर्शकों को पहले से ज्यादा रकम चुकानी होगी। क्रिकेट प्रेमियों का कहना है कि इस फैसले से खेल का रोमांच प्रभावित होगा और आम प्रशंसक के लिए स्टेडियम जाकर लाइव क्रिकेट का मजा लेना कठिन हो जाएगा।