
नई दिल्ली। सरकार ने मंगलवार को कहा कि उसने मनरेगा के तहत धन जारी करने में किसी भी राज्य के साथ कभी भेदभाव नहीं किया है। यह बात ग्रामीण रोजगार योजना के तहत कुछ राज्यों को भुगतान में कथित देरी के खिलाफ लोकसभा में विपक्षी सांसदों के विरोध के बीच कही।
प्रश्नकाल के दौरान जब यह मुद्दा उठाया गया तो लोकसभा में डीएमके और तृणमूल कांग्रेस के सांसद विरोध प्रदर्शन करते हुए सदन के वेल में आ गए। स्पीकर ओम बिरला ने उनसे अपनी सीटों पर वापस जाने का आग्रह किया, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। बिरला ने विपक्ष से प्रश्नकाल के दौरान उठाए गए सवालों का राजनीतिकरण न करने का आग्रह किया।
केरल से कांग्रेस सांसद अदूर प्रकाश ने अपने राज्य में मनरेगा कर्मचारियों की संख्या में कमी को उजागर किया और इसके लिए देरी से भुगतान और कम मजदूरी को जिम्मेदार ठहराया। प्रकाश ने पूछा, केरल में श्रमिकों को पिछले तीन महीनों से उनकी मजदूरी नहीं मिली है, और इस योजना के तहत 811 करोड़ रुपये बकाया हैं। ग्रामीण विकास पर संसदीय स्थायी समिति ने मनरेगा मजदूरी को मुद्रास्फीति से जोड़ने और कार्यदिवसों को बढ़ाकर 150 करने की सिफारिश की है। क्या सरकार बिना देरी के लंबित राशि जारी करेगी?
ग्रामीण विकास राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने फंड रोके जाने के दावों का खंडन करते हुए कहा कि केरल को इस साल पहले ही करीब 3,000 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया, पिछले साल केरल को 3,500 करोड़ रुपये मिले थे। भुगतान जारी करना एक सतत प्रक्रिया है और जो भी बकाया है, उसे अगले कुछ हफ्तों में पूरा कर दिया जाएगा।
डीएमके सांसद कनिमोझी ने भी इस मामले पर चिंता जताते हुए कहा कि तमिलनाडु पिछले पांच महीनों से मनरेगा के तहत 4,034 करोड़ रुपये के भुगतान का इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा, यह योजना मांग आधारित है और अगर भुगतान में 15 दिन से ज्यादा की देरी होती है तो उसे श्रमिकों को ब्याज सहित भुगतान किया जाना चाहिए। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है और हम मंत्री से मिले हैं जिन्होंने हमें आश्वासन दिया है कि बकाया भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन हम अभी भी इंतजार कर रहे हैं।
चिंताओं का जवाब देते हुए पेम्मासानी ने बताया कि यूपीए सरकार द्वारा लागू किए गए मनरेगा अधिनियम में प्रावधान है कि 15 दिनों से अधिक की देरी पर 0.05 प्रतिशत ब्याज का जुर्माना लगेगा। मंत्री ने कहा, कानून के अनुसार, यदि देरी होती है, तो राज्य सरकार शुरू में राशि का भुगतान करती है और केंद्र सरकार इसे वापस करती है। तमिलनाडु को पहले ही 7,300 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। सात करोड़ की आबादी के साथ, तमिलनाडु को 10,000 करोड़ रुपये से अधिक मिलते हैं, जो उत्तर प्रदेश के बराबर है, जिसकी आबादी 20 करोड़ है। पक्षपात का कोई सवाल ही नहीं है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी सरकार का बचाव करते हुए कहा, चाहे तमिलनाडु हो या पश्चिम बंगाल, मोदी सरकार ने कभी किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया। सामग्री लागत सहित लंबित मनरेगा बकाया जल्द ही जारी किया जाएगा।
कृषि मंत्री ने कहा, यूपीए के तहत 2006-07 से 2013-14 तक पश्चिम बंगाल में व्यक्ति-दिवस के लिए केवल 111 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जबकि एनडीए के तहत हमने 239 करोड़ व्यक्ति-दिवस बनाए हैं और 54,515 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।