राजस्थान के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को जेलों से जान से मारने की धमकी मिलने के बाद प्रदेश की जेलों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसको ध्यान में रखते हुए जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी फील्ड में उतर चुके हैं। मंगलवार देर शाम जेल विभाग के एडीजी रुपिंदर सिंह ने दौसा की श्यालावास सेंट्रल जेल का निरीक्षण किया। पुलिस अधीक्षक सागर राणा और अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर जेल में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, हालांकि कोई प्रतिबंधित सामग्री बरामद नहीं हुई। गौरतलब है कि 30 मार्च को इसी जेल में एक नर्सिंगकर्मी को सिम कार्ड ले जाते हुए पकड़ा गया था।
जेल सुरक्षा के लिए नए कदम
एडीजी रूपिंदर सिंह ने कहा कि जेलों में सुरक्षा कड़ी करने के लिए त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं। श्यालावास सेंट्रल जेल में जल्द ही जैमर लगाने की योजना बनाई जा रही है, ताकि मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह से ब्लॉक हो सके। हार्मोनिक कॉल ब्लॉकिंग सिस्टम को सक्रिय करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी, जिससे जेल से फोन कॉल्स को पूरी तरह रोका जा सकेगा। स्टाफ की कमी बनी चुनौती
एडीजी ने जेलों में स्टाफ की कमी को एक बड़ी चुनौती बताया। वर्तमान में कई पद खाली हैं, जिन्हें जल्द भरा जाएगा। तब तक होमगार्ड के जरिए मैनपावर की कमी पूरी की जा रही है। हाल ही में जेलों से धमकी भरे कॉल्स और जेल स्टाफ की संदिग्ध संलिप्तता के मामलों को देखते हुए, जेल विभाग ने निर्देश दिया है कि स्थानीय पुलिस बिना किसी बाधा के जेलों में सर्च ऑपरेशन चला सकेगी। इसके अलावा, जेल प्रशासन को किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सख्ती से निगरानी करने के आदेश दिए गए हैं।