राजस्थान: सूरतगढ़ के करीब IAF का MiG-21 क्रैश, पायलट सुरक्षित

राजस्थान के सूरतगढ़ के करीब मंगलवार शाम मिग-21 फाइटर जेट क्रैश हो गया। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, हादसे की वजह तकनीकी खराबी बताई जा रही है। हादसे से पहले पायलट ने खुद को इजेक्ट कर लिया था और वो सुरक्षित है। पायलट ने हादसे पहले लगभग 08:15 बजे खुद को विमान से सुरक्षित रूप से बाहर निकाल लिया। इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई है। भारतीय वायुसेना ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं।

श्रीगंगानगर जिला प्रशासन की ओर से फिलहाल इस हादसे को लेकर कोई पुष्टि नहीं की गई है। हालांकि स्थानीय लोगों की मानें तो सूरतगढ़ में मिग-21 के क्रैश के समय दूर-दूर तक धमाके जैसी आवाजें सुनाई दी थी। इसके बाद लोगों ने स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया था लेकिन वहां से कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
आपको बता दे, इससे पहले 26 नवंबर को इंडियन नेवी का ट्रेनी एयरक्राफ्ट MiG-29K क्रैश हो गया था। इस एयरक्राफ्ट में दो पायलट सवार थे। इनमें से एक को रेस्क्यू कर लिया गया था और दूसरे पायलट की तलाश में अरब सागर में 11 दिन तक सर्च ऑपरेशन चलाया गया। बाद में उसका शव बरामद हुआ था। इंडियन नेवी ने बताया कि शव कमांडर निशांत सिंह का था।

नेवी ने बताया था कि MiG-29K क्रैश होने की जानकारी 27 नवंबर को अफसरों को मिली थी। इस साल MiG-29K का यह तीसरा क्रैश था। फरवरी में गोवा में रूटीन सॉर्टी (प्रैक्टिस उड़ान) के दौरान नेवी का MiG क्रैश हो गया था। तब पायलट ने खुद को विमान से सुरक्षित बाहर निकाल लिया था।रूस और चीन के बाद भारत मिग-21 का तीसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर है। 1964 में इस विमान को पहले सुपरसोनिक फाइटर जेट के रूप में एयरफोर्स में शामिल किया गया था। शुरुआती जेट रूस में बने थे और फिर भारत ने इस विमान को असेम्बल करने का अधिकार और तकनीक भी हासिल कर ली थी।

तब से अब तक मिग-21 ने 1971 के भारत-पाक युद्ध, 1999 के कारगिल युद्ध समेत कई मौकों पर अहम भूमिका निभाई है। रूस ने तो 1985 में इस विमान का निर्माण बंद कर दिया, लेकिन भारत इसके अपग्रेडेड वैरिएंट का इस्तेमाल करता रहा है। MiG-29 एयरक्राफ्ट कैरियर विक्रमादित्य से ऑपरेट होते हैं। हाल ही में मालाबार में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त युद्धाभ्यास में MiG विमानों में हिस्सा लिया था।