राजस्थान में पर्याप्त ऑक्सीजन, डिमांड घटकर रह गई 460 मीट्रिक टन और उपलब्ध है 538 मीट्रिक टन

प्रदेश में कोरोना में संक्रमण के आंकड़ों में कमी आने से अस्पतालों में दबाव कम होता दिखाई दे रहा हैं। बात करें ऑक्सीजन की तो ऑक्सीजन की डिमांड भी 600 मीट्रिक टन से घट कर 460 मीट्रिक टन ही रह गई है। जबकि सभी स्रोतों से ऑक्सीजन 538 मीट्रिक टन उपलब्ध है। यानि 78 एमटी ऑक्सीजन सरप्लस रही। वहीं तूफान में सप्लाई बाधित होने की आशंका को देखते हुए करीब 450 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का स्टाॅक भी किया हुआ है। ऐसे में ऑक्सीजन अब सरप्लस हो गई है और एक-दो दिन में सभी अस्पतालों तक पहुंचा दी जाएगी। वहीं ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर की संख्या भी डिमांड में कमी का कारण बनी है। कई मरीज ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर के जरिए घर पर ही इलाज ले रहे हैं। कई अस्पतालों में भी ऑक्सीजन प्लांट शुरू हुए हैं।
प्रदेश में गुरुवार को 538 मीट्रिक टन ऑक्सीजन उपलब्ध थी। इसमें से 344 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन थी तथा 194 एमटी ऑक्सीजन एयर सेपरेशन यूनिट व अस्पतालों के यूनिट से मिली है। जबकि सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों की ओर से कंट्रोल रूम में 460 एमटी ऑक्सीजन की डिमांड की गई। यही स्थिति रही तो दो दिन बाद ऑक्सीजन का बड़ा स्टाॅक हो जाएगा। भिवाड़ी, जामनगर, हजिरा के प्लांट से ऑक्सीजन नियमित मिल रही है। ऐसे में अब अस्पतालों की डिमांड के अनुसार सप्लाई हो रही है। एक दो दिन में सामान्य मरीजों व अस्पतालों के लिए ऑक्सीजन को आसानी से उपलब्ध करवाने का सिस्टम खोल दिया जाएगा। हालांकि लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट व एयर सेपरेशन यूनिट पर सरकारी कंट्रोल रहेगा।अब ऑक्सीजन स्टाॅक को मैनेज करने की कवायद शुरू हो गई है। कोरोना के मरीज आने तक ऑक्सीजन कंट्रोल का मैनेजमेंट उद्योग विभाग व सीनियर आईएएस की टीम के पास ही रहेगा। लेकिन अब सामान्य मरीजों के लिए भी अस्पतालों की डिमांड के अनुसार ऑक्सीजन मिल पाएगी। अब तक केवल कोरोना मरीजों को ही प्राथमिकता से ऑक्सीजन मिल पा रही थी, लेकिन मैनेजमेंट टीम सामान्य अस्पतालों की डिमांड की भी गणना करवा रहा है।