दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन का आज यानी 8 फरवरी को 75वां दिन है। रविवार को हरियाणा के कितलाना टोल पर खाप महापंचायत हुई थी। इसमें किसान नेता दर्शनपाल ने कहा कि सरकार को झुकाने के लिए असहयोग आंदोलन छेड़ना होगा। यह भी फैसला किया कि हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश से दिल्ली जाने वाली फल-सब्जी, दूध समेत जरूरत के हर सामान पर रोक लगानी होगी। हरियाणा में अडानी और अंबानी के कारोबार को प्रभावित करने के लिए इनके सामान का बहिष्कार करना होगा। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने सोमवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के जवाब में किसान मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने इस दौरान कहा कि किसान आंदोलन खत्म चर्चा करें। पीएम मोदी ने इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कुछ पंक्तियों का भी जिक्र किया।
पीएम मोदी ने इस दौरान कहा, 'मैं मनमोहन सिंह जी के एक बयान को कोट करता हूं। आदरणीय मनमोहन सिंह ने किसान को उपज बेचने की आजादी दिलाने और भारत को एक कृषि मार्केट बनाने के बारे में बोला था।'
आपको तो गर्व होना चाहिए कि मनमोहन जी ने कहा था- 'मोदी को करना पड़ रहा है'। जिन राज्यों में विपक्ष की सरकार है वहां भी उन्होंने इसे थोडा-थोड़ा लिया ही है। उसके बावजूद भी विरोध।' इस दौरान पीएम मोदी ने यह भी कहा कि मनमोहन सिंह कृषि सुधारों के पक्ष में थे। लेकिन कांग्रेस उनकी बात तो माने।
उन्होंने कहा, 'शरद पवार जी और कांग्रेस ने हमेशा कृषि सुधार की वकालत की। कर पाए या नहीं वो अलग बात है पर इस बारे में हमेशा बयान दिए। लेकिन अचानक यू टर्न ले लिया। राजनीति के लिए हो सकता है कि ये आवश्यक हो लेकिन कम से कम किसानों को तो ये कहते कि बदलाव ज़रूरी है।'पीएम मोदी ने कहा कि आंदोलन करने वाले लोगों से अपील है कि वहां बूढ़े लोग भी बैठे हैं, आंदोलन खत्म करें, मिलकर चर्चा करते हैं। खेती को खुशहाल बनाने के लिए ये समय है, जिसे गंवाना नहीं है। पक्ष-विपक्ष हो, इन सुधारों को हमें मौका देना चाहिए। ये भी देखना होगा कि इनसे ये लाभ होता है या नहीं। मंडियां ज्यादा आधुनिक हों। उन्होंने कहा कि हम बात करने के लिए तैयार हैं। सभी विकल्प खुले हैं। पीएम ने कहा, 'MSP था, MSP है और MSP रहेगा'।
सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर से 1178 पाकिस्तानी खालिस्तानियों के अकाउंट्स हटाने को कहा है। इसका मकसद किसान आंदोलन को लेकर गलत सूचनाओं को फैलने से रोकना है।