राहुल गांधी और अशोक गहलोत पर अर्जुनराम मेघवाल का हमला, बोले- देश ने 1975 की इमरजेंसी भी देखी है

केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने शनिवार को राजस्थान के बीकानेर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी के वोटर आईडी कार्ड को लाभार्थियों से जोड़ने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस हर सकारात्मक पहल की आलोचना करती है। वहीं, अशोक गहलोत के दिल्ली स्थित आकाशवाणी परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर भी मेघवाल ने सवाल उठाए। उन्होंने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भ्रम फैलाने और राजनीतिक माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया। मीडिया से बातचीत में मेघवाल ने कहा कि राहुल गांधी किसी भी अच्छी पहल की आलोचना करने का मौका नहीं छोड़ते। उनके मुताबिक, तकनीक का विकास लगातार होता रहता है और नई पहल को समझे बिना उसका विरोध करना उचित नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी पर सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की आलोचना करने का भी आरोप लगाया।राहुल गांधी की आलोचना पर मेघवाल का पलटवारमेघवाल ने कहा कि सरकार कोई भी अच्छा काम करे, कांग्रेस को उसमें आलोचना का विषय मिल जाता है। वोटर आईडी कार्ड को लाभार्थियों से जोड़ने संबंधी राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने तकनीकी विकास का हवाला दिया और सवाल किया कि इसमें आलोचना करने जैसी क्या बात है।केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को लेकर लोगों के बीच भ्रम पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति से राजनीतिक माहौल प्रभावित होता है। मेघवाल ने अपने बयान में राहुल गांधी की ओर से पहले की गई सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक संबंधी आलोचनाओं का भी जिक्र किया।अशोक गहलोत के आकाशवाणी परिसर में प्रदर्शन पर उठाए सवालपूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए मेघवाल ने दिल्ली के आकाशवाणी परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि अगर कोई लोकतंत्र में अराजकता फैलाता है, तो जनता चुप क्यों रहेगी। मेघवाल ने गहलोत से पूछा कि उन्हें आकाशवाणी परिसर में हुए घटनाक्रम पर भी विचार करना चाहिए।केंद्रीय मंत्री ने भारत निर्वाचन आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से मुलाकात की प्रक्रिया का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आयोग से मिलने के लिए प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की सूची और ज्ञापन देना होता है। इसके बाद आयोग समय तय करता है और मुलाकात का कार्यक्रम बनाया जाता है।मेघवाल का आरोप था कि अशोक गहलोत ने न तो प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की सूची दी और न ही ज्ञापन तैयार किया। इसके बजाय वे आकाशवाणी परिसर में ही मुलाकात करने की मांग पर अड़े रहे। मेघवाल ने इसी घटनाक्रम को अव्यवस्था बताते हुए सवाल किया कि क्या इसे अराजकता नहीं कहा जाना चाहिए।चुनाव आयोग की मुलाकात को लेकर क्या था घटनाक्रम?आकाशवाणी परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में चुनाव आयोग की ओर से भी अक्टूबर में स्पष्टीकरण दिया गया था। आयोग के मुताबिक, किसी राजनीतिक दल ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से पहले से मुलाकात का समय नहीं मांगा था। हालांकि, 7 अक्टूबर को शाम करीब चार बजे दिल्ली पुलिस से जानकारी मिली थी कि राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलकर ज्ञापन देना चाहता है।आयोग के अनुसार, उस समय प्रस्तावित प्रतिनिधिमंडल में 240 सांसदों के शामिल होने और मुलाकात के लिए संसद भवन एनेक्सी को स्थान बनाने की जानकारी दी गई थी। आयोग ने अपने निर्धारित प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को असामान्य बताया। साथ ही, उसने प्रदर्शन कर रहे सांसदों तक अपना वरिष्ठतम अधिकारी भेजकर ज्ञापन लेने की पेशकश भी की थी, लेकिन यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया।चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि राजनीतिक दल मुलाकात के लिए अनुरोध कर सकते हैं, लेकिन तारीख और समय आयोग के प्रोटोकॉल के अनुसार तय होते हैं। आयोग के मुताबिक, 2025 में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात के लिए प्रक्रिया निर्धारित की गई थी। आपातकाल का जिक्र कर कांग्रेस को घेराभाजपा पर अराजकता फैलाने के विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए मेघवाल ने 1975 के आपातकाल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अराजकता की बात करने वालों को देश का इतिहास नहीं भूलना चाहिए। उनके मुताबिक, इंदिरा गांधी के शासनकाल में देश ने आपातकाल का दौर देखा था और उस समय लोकतंत्र कमजोर हुआ था।मेघवाल ने आरोप लगाया कि अब कांग्रेस नेता दूसरों पर अराजकता फैलाने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि उनके अनुसार विपक्ष के नेता खुद अव्यवस्था पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विरोध के नाम पर अशांति फैलाना और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की राजनीति लोकतंत्र के हित में नहीं है।केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष को समझाने के लिए चीफ जस्टिस तक को सामने आना पड़ा। हालांकि, उन्होंने अपनी बातचीत में इस संदर्भ का विस्तृत विवरण नहीं दिया। उन्होंने 1975 के घटनाक्रम का हवाला देते हुए सवाल किया कि लोकतंत्र की बात करने वाले उस दौर को कैसे भूल सकते हैं।'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान का किया बचावमेघवाल ने कहा कि कांग्रेस नेताओं के बयानों और गतिविधियों को देखते हुए भाजपा को जनता के बीच अपनी बात रखने के लिए 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान चलाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि लोगों को यह बताना जरूरी है कि लोकतंत्र की रक्षा होनी चाहिए और अराजकता को खत्म किया जाना चाहिए।उन्होंने दोहराया कि विपक्ष पर लगाए जा रहे आरोपों और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर भाजपा जनता के सामने अपना पक्ष रख रही है। मेघवाल के मुताबिक, इसी उद्देश्य से पार्टी यह अभियान चला रही है।