मनोहर पर्रिकर की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, राजकीय सम्मान के साथ विदाई

गोवा के मुख्‍यमंत्री मनोहर पर्रिकर की अंतिम विदाई के वक्‍त भारी जन सैलाब उमड़ पड़ा। शाम 4 बजे से उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई। शाम छह बजे उनका शव अंतिम संस्‍कार के लिए एसएजी ग्रांउड पर लाया गया। यहां पर लोगों ने उनके अंतिम दर्शन कि‍ए। बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह ने भी उनके पार्थि‍व देह के अंतिम दर्शन किए और पुष्‍पांजलि अर्प‍ित की। गोवा बीजेपी के दूसरे नेताओं ने भी अपनी श्रद्धांज‍ल‍ि दी। आपको बता दे, मनोहर पर्रिकर (Manohar Parrikar) का कैंसर की बीमारी से जूझते हुए 63 साल की उम्र में रविवार को निधन हो गया था। मनोहर पर्रिकर (Manohar Parrikar Dies) अग्नाशय कैंसर से जैसी बीमारी से पीड़ित थे। मनोहर पर्रिकर (Manohar Parrikar News) के निधन पर सोमवार (18 मार्च) को केंद्र सरकार ने एक दिन का वहीं गोवा की राज्य सरकार ने सात दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है।
अंतिम संस्‍कार के वक्‍त उनके दोनों बेटे एसएजी ग्राउंड पर मौजूद हैं। वैदिक मंत्रोच्‍चार के बीच उनका अंतिम संस्‍कार किया जा रहा है। पहले उनकी पार्थि‍व देह से तिरंगा हटाया गया। इसके बाद गोलियों के साथ उन्‍हें राजकीय सम्‍मान दिया गया। पर्रिकर की अंतिम यात्रा शाम चार बजे शुरू हुई। अंतिम संस्कार के लिए उनका पार्थ‍िव शव शाम 6 बजे मिरामर पहुंचा। मनोहर पर्र‍िकर की पहचान आधुनिक गोवा के निर्माता के रूप में रही है। उनकी सादगी हमेशा लोगों के बीच चर्चा का विषय रही।सोमवार को उनकी पार्थ‍िव देह को सबसे पहले बीजेपी ऑफ‍िस में रखा गया। इसके बाद उसे कला परिषद में लाया गया। दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक गोवा के लोगों ने अपने मुख्‍यमंत्री के अंतिम दर्शन कि‍ए। पर्रिकर लंबे समय से कैंसर की बीमारी से पीड़‍ित थे। रविवार शाम उनका निधन हो गया। गोवा के लोगों के बीच पर्रि‍कर कितने लोकप्रिय थे, इस बात का अंदाजा उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ को देखकर लगाया जा सकता है। लोग नम आंखों से अपने सीएम की अंतिम यात्रा में शामि‍ल हुए। उनके दर्शन करने आईें केंद्रीय मंत्री स्‍मृति ईरानी तो रोने लगीं। 13 दिसंबर, 1955 को गोवा के मापुसा में जन्मे पर्रिकर की शिक्षा लोयोला स्कूल, मडगांव में हुई और उसके बाद उन्‍होंने 1978 में स्नातक की उपाधि, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्‍बई से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में प्राप्‍त की। राजनीति में आने से पहले पर्रिकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में शामिल हुए। गौरतलब है कि गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का रविवार को उनके निजी आवास पर निधन हो गया। वह 63 वर्ष के थे। चार बार के मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री पर्रिकर फरवरी 2018 से ही अग्नाशय संबंधी बीमारी से पीड़ित थे। मनोहर पर्रिकर भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी के ऐसे पहले राजनेता थे जिन्होंने ख़ुद को 'सॉफ्ट हिंदुत्व' के आइकन के रूप में आगे रखते हुए सभी समुदायों को शांति का संदेश दिया वो भी ऐसे माहौल में जब उनकी पार्टी देश के दूसरे हिस्सों में हिंदुत्व पर आक्रामक रूप अपनाए हुई थी। उन्होंने ऐसे वक्त में जब लोगों का राजनीति पर से भरोसा उठता जा रहा था, अपनी व्यक्तिगत हैसियत से आदर्श पेश कर लोगों में भरोसा जगाया। सजग और पढ़े-लिखे मध्य वर्ग ने उन पर दांव लगाया और एक तरह से पर्रिकर उनके नायक बन गए। पर्रिकर गोवा में बीजेपी के निर्विवाद नेता था, पार्टी में ऐसा कोई नहीं था, जो उन्हें चुनौती देता। वो बीजेपी के उन चार विधायकों में शामिल थे, जो सबसे पहले बीजेपी के टिकट पर गोवा विधानसभा के लिए चुने गए थे।