वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज, 1 फरवरी को संसद में बजट 2025-26 की घोषणा की और छात्रों के लिए कई अहम ऐलान किए। उन्होंने IIT संस्थानों में 6500 सीटें बढ़ाने की घोषणा की और साथ ही AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के क्षेत्र में 3 नए सेंटर खोलने की बात कही। इसके अलावा, मेडिकल क्षेत्र में छात्रों के लिए 10,000 सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है, जिससे आगामी 5 सालों में मेडिकल शिक्षा की उपलब्धता में सुधार होगा।
मेडिकल शिक्षा में बढ़ोतरी
देश में मेडिकल शिक्षा को लेकर हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहा है, खासकर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की कमी के कारण। वहीं, प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में अध्ययन करने के लिए छात्रों को भारी खर्च उठाना पड़ता है। इस समस्या का समाधान करते हुए वित्त मंत्री ने मेडिकल छात्रों के लिए 10,000 सीटें बढ़ाने का ऐलान किया, जिससे उन्हें सरकारी कॉलेजों में प्रवेश की अधिक अवसर मिलेंगे और प्राइवेट कॉलेजों के उच्च खर्च से बचने में मदद मिलेगी।
AI शिक्षा के लिए बजटइसके अलावा, AI शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जो AI के क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देगा
देश में कुल कितनी मेडिकल सीटें हैं?देश में वर्तमान में 1,12,112 एमबीबीएस सीटें हैं, जिन पर हर साल प्रवेश की बड़ी प्रतिस्पर्धा होती है। इन सीटों पर NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) के जरिए छात्रों का चयन किया जाता है। 2014 तक, देश में केवल 51,348 एमबीबीएस सीटें थीं, जब तक देश में कुल 387 मेडिकल कॉलेज थे। लेकिन मोदी सरकार के आने के बाद, मेडिकल कॉलेजों की संख्या और एमबीबीएस सीटों में लगातार वृद्धि हुई है। जुलाई 2024 तक, देश में 731 मेडिकल कॉलेज हैं।
पोस्ट-ग्रेजुएट सीटों में भी बढ़ोतरीइसके अलावा, पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल सीटों की संख्या में भी बढ़ोतरी की गई है। 2014 तक 31,185 सीटें थीं, जो जुलाई 2024 तक बढ़कर 72,627 हो गई हैं। अब आने वाले समय में इन सीटों में और इजाफा होने से मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों को राहत मिलेगी और सरकारी कॉलेजों में प्रवेश के अवसर भी बढ़ेंगे।
किन राज्यों को मिलेगा फायदा?मेडिकल सीटों में बढ़ोतरी से सभी राज्यों के छात्रों को फायदा होगा, क्योंकि एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) और अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और पीजी सीटों में इजाफा किया जाएगा। इससे देशभर के छात्रों को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई का मौका मिलेगा और उनका भविष्य बेहतर होगा।