कृषि कानून के मसले पर आक्रामक हुई बीजेपी, देशभर में होंगी 700 चौपाल

नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 16वां दिन है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर गुरुवार को मीडिया से मुखातिब हुए और एक बार फिर किसानों से आंदोलन खत्म करने की गुजारिश की। कृषि मंत्री की अपील का किसानों पर कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने साफ और स्पष्ट शब्दों में आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर दिया। किसान पहले दिन से तीनों कृषि कानून रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं। अब किसानों ने आंदोलन को बड़े स्तर पर ले जाने की ठान ली है। उधर, पंजाब के अलग-अलग इलाकों से 30 हजार और किसान दिल्ली आ रहे हैं। किसान नेता बूटा सिंह ने कहा कि कानून रद्द करने को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ, इसलिए जल्द ट्रेनें रोकने की तारीख का ऐलान करेंगे। वहीं भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार और किसान दोनों को पीछे हटना होगा। सरकार कानून वापस ले तो किसान अपने घरों को चले जाएंगे।

कृषि कानून के मसले पर किसानों और विपक्ष के विरोध का सामना कर रही भारतीय जनता पार्टी अब फ्रंटफुट पर खेलने की तैयारी में है। बीजेपी शुक्रवार से देश के अलग-अलग शहरों में 700 प्रेस कॉन्फ्रेंस और चौपाल का आयोजन करेगी। इसके जरिए मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानून के फायदों को गिनाया जाएगा और किसानों को इसके बारे में समझाया जाएगा।

सरकार की ओर से बीते दिन कृषि कानून पर एक बुकलेट जारी की गई थी। इसें तीनों कृषि कानूनों के फायदों को गिनाया गया था। इसके अलावा कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कृषि कानून के फायदे गिनाए थे। दोनों ने किसानों से आंदोलन खत्म करने की अपील की थी। लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए है। ऐसे में बीजेपी ने पार्टी स्तर पर कृषि कानूनों के मसले को जनता के सामने पेश करने का प्लान बनाया है।

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों का किसान पुरजोर विरोध कर रहे हैं। पिछले दो हफ्तों से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का डेरा है। केंद्र सरकार ने किसानों के साथ बात करने की कोशिश की, कानूनों में कुछ संशोधन भी सुझाए लेकिन बात नहीं बन सकी।
बीजेपी ने विपक्ष पर लगाया आरोप

भारतीय जनता पार्टी ने लगातार कृषि कानून के मसले पर विपक्ष पर किसानों को भड़काने का आरोप लगाया है। बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष किसानों के कंधे पर बंदूक रख चला रहा है और बिचौलियों का पक्ष ले रहा है। बीजेपी का दावा है कि तीनों कानून किसानों के फायदे के हैं, अगर किसानों को कुछ शंकाएं हैं तो बातचीत से हल निकल सकता है।

हाल ही में राजस्थान के पंचायत चुनाव और देश के अन्य राज्यों में हुए कुछ चुनावों में मिली जीत के बाद बीजेपी की ओर से इसे कृषि कानून पर समर्थन के तौर पर पेश किया गया। बीते दिनों प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि राजस्थान में दो करोड़ से अधिक किसानों ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई मौकों पर आरोप लगाया है कि विपक्ष किसानों को भड़का रहा है। पीएम मोदी ने कहा है कि सरकार MSP खत्म नहीं करेगी, मंडी सिस्टमों में भी किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। सरकार की ओर से भी किसानों को जो लिखित संशोधन दिए गए थे, उनमें इनका जिक्र किया गया था। हालांकि, किसानों ने सरकार के संशोधनों को मानने से इनकार किया और कानून रद्द करने की मांग पर अड़े रहे।
पंजाब के किसान की बिहार जैसी हालत करना चाहती है मोदी सरकार- राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने एक बार फिर किसान आंदोलन (Kisan Andolan) को लेकर ट्वीट किया है। राहुल ने एक चार्ट शेयर कर दावा किया है कि पंजाब और हरियाणा के किसीन सबसे ज्यादा कमाई करते हैं जबकि बिहार के किसान की कमाई कम है। राहुल ने लिखा है कि 'किसान चाहता है कि उसकी आय पंजाब के किसान जितनी हो जाए। मोदी सरकार चाहती है कि देश के सब किसानों की आय बिहार के किसान जितनी हो जाए।'

राहुल गांधी ने जो चार्ट शेयर किया है कि उसमें दावा किया गया है कि पंजाब के किसान सबसे ज्यादा कमाई करते हैं जबकि बिहार के किसान की सालाना आमदनी सबसे कम है। राहुल गांधी ने दावा किया गया है कि एक कृषक परिवार की कमाई का सालाना औसत 77,124 रुपये कमाता है। अगर इसे महीने में बांटे तो यह 6,427 रुपये होता है। दावा किया गया है कि यह मासिक आय, महीने के 6,223 रुपए के खर्च की सीमा को बड़ी मुश्किल से पार कर पाता है। ऐसे में किसानों के पास बहुत कम बचत हो पाती है।