बीजेपी के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी रविवार, 8 नवंबर 2026 को 99 वर्ष के हो गए। इस अवसर पर वह अपने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए एक विशेष लेख लिखा है। इसमें उन्होंने आडवाणी के राजनीतिक जीवन, विभाजन के दौरान झेले गए संघर्ष, जनसंघ को मजबूत बनाने, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के निर्माण और देश की राजनीति में उनके योगदान को याद किया।प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि आडवाणी का जीवन आधुनिक भारत के कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक पड़ावों से जुड़ा रहा है। उन्होंने विभाजन के बाद नए सिरे से जीवन शुरू करने से लेकर आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा और सोमनाथ से अयोध्या तक राम रथ यात्रा का नेतृत्व करने तक के उनके सफर का उल्लेख किया। पीएम मोदी ने आडवाणी के व्यक्तित्व के दूसरे पहलुओं, जैसे पढ़ने की रुचि, संस्कृति और सिनेमा के प्रति लगाव तथा लेखन के योगदान को भी रेखांकित किया।विभाजन के बाद नए सिरे से शुरू किया जीवनलालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची में हुआ था, जो उस समय अविभाजित भारत का हिस्सा था और अब पाकिस्तान में है। साल 1947 में विभाजन के दौरान उन्हें सिंध छोड़ना पड़ा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में इस दौर की कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि आडवाणी ने बिना किसी कटुता के नए सिरे से अपना जीवन खड़ा किया। उनके मुताबिक, विपरीत परिस्थितियों में शुरुआत से निर्माण करने का यही गुण आगे चलकर जनसंघ और बीजेपी को मजबूत बनाने में भी दिखाई दिया। पीएम मोदी ने आडवाणी की वैचारिक स्पष्टता, बौद्धिक क्षमता और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि आडवाणी ने पार्टी के कार्यकर्ताओं की कई पीढ़ियों को तैयार किया और संगठन को 'नेशन फर्स्ट' यानी राष्ट्र प्रथम की सोच पर आधारित मजबूत आधार दिया। प्रधानमंत्री ने उनके भाषणों, लेखन और राजनीतिक विचारों को भी उनके व्यक्तित्व का अहम हिस्सा बताया।जनसंघ से बीजेपी के विस्तार तक का सफरआडवाणी ने जनसंघ को मजबूत करने में लंबा समय लगाया और बाद में भारतीय जनता पार्टी के निर्माण तथा विस्तार में अहम भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री ने अपने लेख में बताया कि आडवाणी के बीजेपी अध्यक्ष रहने के दौरान पार्टी ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत की। 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सीटें 400 से घटकर 200 से नीचे आ गईं, जबकि 1996 में बीजेपी पहली बार लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। मोदी ने इन राजनीतिक पड़ावों का उल्लेख करते हुए आडवाणी की संगठनात्मक भूमिका को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने आडवाणी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दशकों लंबे राजनीतिक साथ को भी याद किया। उनके अनुसार, दोनों नेताओं ने लंबे समय तक एक-दूसरे के साथ काम किया और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बजाय आपसी सहयोग, विश्वास और सम्मान की मिसाल पेश की। मोदी ने कहा कि दोनों नेताओं ने मिलकर भारतीय राजनीति की दिशा को प्रभावित किया।आपातकाल में लोकतंत्र की रक्षा का संघर्षपीएम मोदी ने आपातकाल को आडवाणी के जीवन का निर्णायक पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि इस दौरान आडवाणी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के संघर्ष में आगे रहे। प्रधानमंत्री ने आडवाणी की पुस्तक A Prisoner's Scrap-Book का भी जिक्र किया। इस किताब के एक हिस्से 'A Tale of Two Emergencies' में आडवाणी ने भारत में जून 1975 से शुरू हुए आपातकाल और 1933 में नाजी जर्मनी की घटनाओं के बीच समानताओं पर विचार किया था।आपातकाल के बाद 1977 में जनता सरकार बनने पर आडवाणी को सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया। बाद में उन्होंने केंद्र सरकार में गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में आडवाणी ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया। आतंकवाद के खिलाफ उनके सख्त रुख और सुरक्षा बलों के हित में किए गए प्रयासों का भी लेख में उल्लेख किया गया है।सोमनाथ से अयोध्या तक की राम रथ यात्रा का जिक्रआडवाणी के राजनीतिक जीवन के सबसे चर्चित पड़ावों में सोमनाथ से अयोध्या तक निकाली गई राम रथ यात्रा भी शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय बताया। उन्होंने लिखा कि इस यात्रा की परिकल्पना से लेकर उसके आयोजन और क्रियान्वयन तक उन्हें भी योगदान देने का अवसर मिला था। मोदी ने सोमनाथ से यात्रा शुरू होने के समय वहां मौजूद रहने को अपने लिए खास अनुभव बताया।प्रधानमंत्री ने यात्रा के दौरान आडवाणी की लंबी यात्राओं, लगातार कार्यक्रमों और शारीरिक थकान के बावजूद काम जारी रखने की क्षमता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बिहार में आडवाणी की गिरफ्तारी और उसके बाद गुजरात में बीजेपी द्वारा चिमनभाई पटेल सरकार से समर्थन वापस लेने की घटना को भी याद किया। मोदी के लेख के अनुसार, उस समय पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राम मंदिर निर्माण के संकल्प को दोहराया था।सादगी, पढ़ने और सिनेमा में भी रही गहरी रुचिप्रधानमंत्री मोदी ने आडवाणी के राजनीतिक जीवन के अलावा उनके निजी व्यक्तित्व से जुड़े पहलुओं को भी सामने रखा। उन्होंने उनकी सादगी, अध्ययनशीलता और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी की सराहना की। मोदी के मुताबिक, आडवाणी नियमित रूप से अखबार पढ़ते हैं और पुस्तकों के साथ-साथ इतिहास में भी उनकी गहरी रुचि रही है। उनकी पुस्तक My Country My Life में इतिहास और उसे सहेजकर रखने की उनकी सोच दिखाई देती है।आडवाणी को सिनेमा और थिएटर में भी दिलचस्पी रही है। प्रधानमंत्री ने उन्हें सिनेमा का प्रशंसक और एक उत्साही फिल्म समीक्षक बताया। उन्होंने आडवाणी के सिंधी संस्कृति से जुड़े रहने और लेह के पास सिंधु दर्शन पूजा को लोकप्रिय बनाने के उनके प्रयासों का भी उल्लेख किया। मोदी ने आडवाणी की पत्नी कमला आडवाणी के योगदान को याद करते हुए कहा कि वह उनके सार्वजनिक जीवन में लगातार ताकत और सहयोग का स्रोत रहीं।2024 में मिला भारत रत्नदेश के सार्वजनिक जीवन और राजनीति में लंबे योगदान के लिए लालकृष्ण आडवाणी को वर्ष 2024 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 31 मार्च 2024 को नई दिल्ली स्थित उनके आवास पर आयोजित समारोह में उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया था। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।अपने लेख के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने आडवाणी के 100वें वर्ष में प्रवेश पर उनके अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। उन्होंने कहा कि आडवाणी का जीवन और उनका सार्वजनिक योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
FAQQ1. लालकृष्ण आडवाणी का जन्म कब हुआ था?लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है।
Q2. 8 नवंबर 2026 को आडवाणी कितने साल के हो गए?8 नवंबर 2026 को आडवाणी 99 वर्ष के हो गए और उन्होंने अपने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश किया।
Q3. पीएम मोदी ने आडवाणी के किन प्रमुख योगदानों को याद किया?प्रधानमंत्री ने जनसंघ को मजबूत बनाने, बीजेपी के निर्माण, आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा, राम रथ यात्रा और सरकार में उनके योगदान का उल्लेख किया।
Q4. लालकृष्ण आडवाणी ने केंद्र सरकार में कौन-कौन से प्रमुख पद संभाले?आडवाणी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री, गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारियां निभाईं।
Q5. लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न कब मिला था?राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 31 मार्च 2024 को नई दिल्ली स्थित उनके आवास पर आयोजित समारोह में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया था।