उत्तर-पूर्वी दिल्ली जिले में बिगड़े हालात को काबू करने की जिम्मेदारी खुद गृह मंत्री अमित शाह ने अपने हाथ में ले ली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तमाम आला हुक्मरानों को आपात बैठक में तलब किया। आपात बैठक में केंद्रीय गृह सचिव एके भल्ला सहित दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल और दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक को सख्त हिदायत दी गई कि किसी भी तरह से जल्दी से जल्दी हालात पर काबू पाएं। केंद्रीय गृह सचिव एके भल्ला ने देर शाम बताया कि उत्तर पूर्वी दिल्ली के हालातों पर पैनी नजर रखी जा रही है। काफी हद तक स्थिति नियंत्रण में आ चुकी है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों को सतर्क रहने को कहा गया है। साथ ही अगर जरूरत महसूस हुई तो केंद्र सरकार अन्य कड़े कदम उठाने से भी नहीं चूकेगी। हमारा मकसद हर हाल में शांति कायम करना है।
हिंसा की आग में झुलसी उत्तर पूर्वी दिल्ली, पांच मौतें, 100 घायल, 5 मेट्रो स्टेशन-स्कूल-कॉलेज बंद, धारा 144 लागू
वहीं, रविवार को शुरू हुई हिंसा आज तीसरे दिन मंगलवार को भी जारी है। आज फिर दिल्ली के मौजपुर में प्रदर्शनकारी मुंह पर कपड़ा बांधकर पथराव करते नजर आ रहे हैं। सुबह-सुबह पांच मोटरसाइकिल को आग के हवाले कर दिया गया। मौके पर बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात है। जाफराबाद में भी मौजपुर जैसे ही हालत हैं। एहिताहतन जाफराबाद, मौजपुर-बाबरपुर, गोकुलपुरी, जौहरी एन्क्लेव और शिव विहार मेट्रो स्टेशन को बंद कर दिया गया है। पूरे इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है। इसके साथ ही नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के सभी स्कूल आज बंद है। धारा 144 लागू कर दी गई है। पूरे इलाके में पुलिस फोर्स की भारी तैनाती की गई है। दिल्ली से सटे दूसरे राज्यों को हाई अलर्ट कर दिया गया है। बता दें कि अब तक इस हिंसा में 5 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 100 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं।सोमवार को चांद बाग से लेकर जाफराबाद तक पूर्वोत्तर दिल्ली के इलाकों में खूनी संघर्ष हुआ था। रविवार से जगह जगह शुरू हुआ ये हिंसक प्रदर्शन इससे पहले हुए प्रदर्शनों से काफी अलग है। अब तक लोग सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन करते वक्त हिंसक होते थे तो उनका सामना सीधे पुलिस से होता था। इस बार सीएए के विरोध में प्रदर्शन के बाद शुरू हुई हिंसा ने सांप्रदायिक रंग ले लिया है। एक ओर सीएए का विरोध करने वाले हैं और दूसरी ओर इसका समर्थन करने वाले। दोनों एक दूसरे पर हमले कर रहे हैं।