छत्रपति संभाजीनगर। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने नई दिल्ली से अपने गृह नगर लौटते ही केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। बुधवार (29 जुलाई) को छत्रपति संभाजीनगर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि छात्र किसी भी हाल में आतंकवादी नहीं हैं, बल्कि देश के भविष्य की पहचान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल छात्रों को अब भी परेशान किया जा रहा है और यदि सरकार ने अपना रवैया नहीं बदला तो युवाओं का आक्रोश और अधिक बढ़ सकता है।
दीपके ने साफ शब्दों में कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को आंदोलन का अंत समझना सरकार की भूल होगी। उनके अनुसार छात्रों और युवाओं के भीतर अभी भी नाराजगी कायम है और यदि उनकी मांगों की अनदेखी होती रही तो आने वाले समय में इससे भी बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है।
'छात्रों पर कार्रवाई बंद करे सरकार'अभिजीत दीपके ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो CJP अपने आंदोलन को जारी रखेगी और जरूरत पड़ने पर पहले से अधिक व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना होगा कि छात्रों के मन में मौजूद असंतोष अभी खत्म नहीं हुआ है। अगर युवाओं की आवाज को दबाने की कोशिश की गई तो इसके राजनीतिक परिणाम भी सामने आ सकते हैं।
पीएम मोदी पर भी साधा निशानापत्रकारों से बातचीत के दौरान दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि छात्र देश की सबसे बड़ी ताकत हैं और उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, ये छात्र आतंकवादी नहीं हैं, ये देश का भविष्य हैं। अगर भविष्य के साथ ऐसा व्यवहार होगा तो जैसे धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा, वैसे ही युवा सरकार भी बदल सकते हैं, अगर वह सही रास्ते पर नहीं आई। एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा देकर 'इन्फ्लुएंसर' बन जाना चाहिए, क्योंकि उनके मुताबिक वह उस भूमिका में ज्यादा बेहतर हैं।
करीब 40 दिन बाद लौटे घरदीपके हाल ही में दिल्ली में चले लंबे छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने बताया कि वह लगभग 40 दिनों बाद अपने घर लौटे हैं। उन्होंने कहा कि भारत आने के बाद से ही वह लगातार आंदोलनों में व्यस्त रहे और लगभग 36 दिनों तक जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ डटे रहे।
उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य छात्रों की आवाज सरकार तक पहुंचाना था और वह इसे छात्रों की जीत मानते हैं। अब घर लौटने की सबसे बड़ी खुशी उन्हें अपने माता-पिता से मिलने की है, जिनसे वह लंबे समय बाद मुलाकात करेंगे।
'अब भी छात्रों को धमकाया जा रहा है'दीपके ने आरोप लगाया कि आंदोलन समाप्त होने के बाद भी कई राज्यों में छात्रों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। उनके अनुसार विभिन्न राज्यों की पुलिस प्रदर्शन में शामिल छात्रों के घरों तक पहुंच रही है और उन्हें गिरफ्तार करने की चेतावनी दी जा रही है।
उन्होंने 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दिन छात्रों का खून सड़कों पर बहा था, जो बेहद दुखद था। उनका कहना था कि इतनी घटनाओं के बाद भी यदि छात्रों को लगातार परेशान किया जा रहा है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
पेपर लीक कानून और फास्ट-ट्रैक कोर्ट पर उठाए सवाललोकसभा से पारित 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपके ने कहा कि केवल नए कानून बना देने से समस्या खत्म नहीं होगी। उनके अनुसार जब तक व्यवस्था चलाने वालों की नीयत में बदलाव नहीं आएगा, तब तक किसी भी सुधार का अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार लगातार सुधारों की बात करती है, लेकिन वास्तविक बदलाव ईमानदार नीयत और प्रभावी क्रियान्वयन से ही संभव है।
CBI की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवालपेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए गठित फास्ट-ट्रैक कोर्ट का जिक्र करते हुए अभिजीत दीपके ने जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मामले की पहली सुनवाई ही इसलिए टल गई क्योंकि CBI की ओर से वकील अदालत में मौजूद नहीं थे।
दीपके ने कहा कि यदि गंभीर मामलों में भी इस तरह की लापरवाही देखने को मिलेगी तो लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होगा। उनके अनुसार पेपर लीक जैसे मामलों में केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समयबद्ध और गंभीर कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है।