देश में कोरोना संकट से लड़ने के लिए लगाया गया लॉकडाउन मजदूरों के लिए लगातार परेशानियों का सबब बनता जा रहा है। लॉकडाउन के बाद रोजी-रोटी के लिए मोहताज हुए श्रमिक अपने घरों तक पहुंचने के लिए जद्दोजेहद करते दिखाई दे रहे हैं। इसी से जुड़ी एक दास्तां भरतपुर से भी सामने आ रही है। यहां एक बेबस और मजलूम पिता की मजबूरी ने उसे चोरी करने पर मजबूर कर दिया। मोहम्मद इकबाल नाम के शख्स ने अपने दिव्यांग बेटे को 1150 किमी दूर ले जाने के लिए साइकिल चुरा ली... लेकिन दूसरी तरफ साइकिल मालिक के नाम चिट्ठी भी लिखी जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस चिट्ठी में साइकिल ले जाने वाले शख्स ने अपनी मजबूरी गिनाते हुए साइकिल मालिक से माफी मांगी है। साथ ही उसे साइकिल ले जाने के लिए भी सूचित किया है। चिट्ठी में लिखा कि मैं आपका कसूरवार हूं, लेकिन मजदूर हूं और मजबूर भी। मैं आपकी साइकिल लेकर जा रहा हूं। मुझे माफ कर देना...
क्या लिखा चिट्ठी में?सोशल मीडिया पर वायरल हो रही चिट्ठी में श्रमिक ने नमस्ते के संबोधन के साथ लिखा है कि 'मैं आपकी साइकिल लेकर जा रहा हूं... हो सके, तो मुझे माफ कर देना जी, क्योंकि मेरे पास घर जाने का कोई साधन नहीं है... मेरा एक बच्चा है, उसके लिए मुझे ऐसा करना पड़ रहा है, क्योंकि वो विकलांग है , चल नहीं सकता, हमें बरेली तक जाना है। आपका कसूरवार , एक यात्री, एक मजदूर। चिट्ठी में साफ झलक रहा है कि कैसे एक पिता को बेटे की मजबूरी के चलते इस तरह का कदम उठाना पड़ा है।
साइकिल मालिक ने कहा - इकबाल की चिट्ठी से आंखें भर आईंदरअसल, रारह गांव के सहनावली में रहने वाली साइकिल मालिक साहब सिंह को बरामदे से साइकिल गायब होने का पता चला। सफाई के वक्त कागज का छोटा सा टुकड़ा मिला, जिस पर इकबाल ने अपना दर्द लिखा था। साहब सिंह बताते हैं- 'इकबाल की चिट्ठी से आंखें भर आईं। साइकिल चोरी हो जाने का जो आक्रोश और चिंता थी, वह अब संतोष में बदल गई है। मेरे मन में इकबाल के प्रति कोई द्वेष नहीं है, बल्कि यह साइकिल सही मायने में किसी के दर्द के दरिया को पार करने में काम आ रही है। इकबाल ने बेबसी में यह दुस्साहस किया, जबकि बरामदे में और भी कई कीमती चीजें पड़ी थीं, लेकिन उसने किसी भी चीज के हाथ नहीं लगाया।'
मोहम्मद इकबाल कौन था कहां से आया था... क्या करता था... बरेली में उसे कहां जाना था... इसका कोई पता नहीं चल सका, लेकिन वह उन हजारों मजदूरों में से एक हैं, जो लॉकडाउन में अपनी रोजी-रोजी छिनने के बाद अपने घर पहुंचने की जद्दोजहद में हैं।