नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा से पास, शाह ने कहा - घुसपैठियों को जाना होगा, बुधवार को राज्यसभा में हो सकता है पेश

लोकसभा में सोमवार को नागरिकता संशोधन बिल को मंजूरी मिल गई है। इस बिल के पक्ष में 311 वोट पड़े हैं। वहीं विपक्ष में 80 वोट पड़े हैं। इस बिल के पास होने से अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोग भारतीय में नागरिकता के लिए आवेदन करने के पात्र बन गए हैं। लोकसभा में इस विधेयक पर लगातार सात घंटे से भी अधिक समय तक चर्चा चली। इस दौरान विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। विपक्ष ने केंद्र सरकार के सामने कई सवाल रखे जिनका जवाब गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में दिया। नागरिकता संशोधन बिल (CAB) के लोकसभा से पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृह मंत्री अमित शाह की तारीफ की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि अमित शाह ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 के बारे में विस्तार से बताया। मैं इसके लिए अमित शाह की तारीफ करना चाहूंगा। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि अमित शाह ने सदन में चर्चा के दौरान सांसदों के उठाए सवालों का विस्तार से जवाब दिया। एक अन्य ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 लोकसभा से पास हो गया है। इस विधेयक पर बेहद महत्वपूर्ण चर्चा हुई। मैं सभी सांसदों को समर्थन के लिए धन्यवाद देता हूं। इस बिल में सदियों से चली आ रही भारतीय परंपरा और मानवीय मूल्यों में विश्वास की झलक दिखती है। अब यह बिल बुधवार को राज्यसभा में पेश किया जा सकता है।
अमित शाह ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला

नागरिकता संशोधन बिल पर बहस के दौरान सदन में जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह विधेयक लाखों करोड़ों शरणार्थियों के यातनापूर्ण नरक जैसे जीवन से मुक्ति दिलाने का साधन बनने जा रहा है। जो लोग भारत के प्रति श्रद्धा रखते हैं और हमारे देश में आते हैं तो उन्हें नागरिकता मिलेगी। अमित शाह ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस देश का विभाजन न करती तो मुझे यह बिल लेकर नहीं आना पड़ता। लोकसभा में शाह ने कहा, मैं चाहता हूं देश में भ्रम की स्थिति न बने। किसी भी तरीके से ये बिल गैर संवैधानिक नहीं है। न ही ये बिल अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है। धर्म के आधार पर ही देश का विभाजन हुआ था। देश का विभाजन धर्म के आधार पर न होता तो अच्छा होता। इसके बाद इस बिल को लेकर आने की जरूरत हुई। 1950 में नेहरू-लियाकत समझौता हुआ था, जो कि धरा का धरा रह गया।यह विधेयक कहीं से भी असंवैधानिक नहीं : अमित शाह

अमित शाह ने आगे कहा, 1947 में पाकिस्तान में 23 फीसदी हिंदू थे लेकिन वहीं साल 2011 में ये आंकड़ा 3.4 फीसदी रह गया। बांग्लादेश में 1947 में अल्पसंख्यकों की आबादी 22 प्रतिशत थी जो 2011 में कम होकर 7.8 प्रतिशत हो गई। शाह ने कहा कि भारत में 1951 में 84 प्रतिशत हिंदू थे जो 2011 में कम होकर 79 फीसदी रह गये, वहीं मुसलमान 1951 में 9.8 प्रतिशत थे जो 2011 में 14.8 प्रतिशत हो गए हैं। पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्यचारों पर भारत चुप नहीं रहेगा। अमित शाह ने यह भी कहा कि मैं सदन के माध्यम से पूरे देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि यह विधेयक कहीं से भी असंवैधानिक नहीं है। विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं करता है। अगर इस देश का विभाजन धर्म के आधार पर नहीं होता तो मुझे विधेयक लाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। शाह ने कहा, 'नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री रहते हुए देश में किसी भी धर्म के लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। यह सरकार सभी को सम्मान और सुरक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है। जब तक मोदी प्रधानमंत्री हैं, संविधान ही सरकार का धर्म है।' अमित शाह ने यह भी कहा कि ये बिल किसी धर्म के खिलाफ भेदभाव नहीं करता। उन्होंने कहा, ये बिल एक सकारात्मक भाव लेकर आया है उन लोगों के लिए जो भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में प्रताड़ित हैं। प्रताड़ित शरणार्थी होता है, घुसपैठिया नहीं होता। बिल में संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 25 का उल्लंघन नहीं है।वोट के लिए घुसपैठियों को शरण देने वाले चिंतित हैं : अमित शाह

भाषण के दौरान अमित शाह ने कहा, जो वोट बैंक के लिए घुसपैठियों को शरण देना चाहता है, हम उन्हें सफल नहीं होने देंगे। वोट के लिए घुसपैठियों को शरण देने वाले चिंतित हैं। रोहिंग्या को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। रोहिंग्या बांग्लादेश के जरिए भारत आते हैं। उन्होंने कहा, किसी भी रिफ्यूजी पॉलिसी को भारत ने स्वीकार नहीं किया है। पारसी भी प्रताड़ित होकर ईरान से भारत आए थे। कांग्रेस ने जिन्ना की टू नेशन थ्योरी क्यों मानी? कांग्रेस ने विभाजन को क्यों नहीं रोका? पीओके हमारा है और वहां के लोग भी हमारे हैं। उसने धर्म के आधार पर देश का विभाजन स्वीकार किया था, यह ऐतिहासिक सत्य है। शाह ने कहा कि हमारी अल्पसंख्यकों को लेकर अवधारणा संकुचित नहीं है जैसा विपक्ष के सदस्य आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह यहां के अल्पसंख्यकों की बात ही नहीं कर रहे। यह उन तीन देशों के अल्पसंख्यकों की बात है। उन्होंने कहा कि इस देश में इतनी बड़ी आबादी मुस्लिमों की है। कोई भेदभाव नहीं हो रहा। तस्वीर ऐसी बनाई जा रही है कि अन्याय हो रहा है।