नई दिल्ली। सार्वजनिक परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर देशभर में हुए छात्र आंदोलनों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सहयोगी पार्टी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (SKM) ने संसद के भीतर खुलकर अपनी राय रखी। पार्टी ने कहा कि छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को नकारात्मक नजरिए से देखने के बजाय उन्हें देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग के रूप में समझा जाना चाहिए।
लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान SKM सांसद इंद्र हांग सुब्बा ने कहा कि हाल के महीनों में छात्रों द्वारा किए गए व्यापक प्रदर्शन इस बात का संकेत हैं कि युवाओं में परीक्षा व्यवस्था को लेकर गहरी निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। उनके अनुसार यह सरकारों और जनप्रतिनिधियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को मजबूत बनाने की दिशा में गंभीर कदम उठाने की जरूरत है।
छात्रों की आवाज को गंभीरता से लेने की जरूरत: SKMसिक्किम से लगातार दो बार लोकसभा सांसद चुने गए इंद्र हांग सुब्बा ने सदन में कहा कि सड़कों पर उतरकर अपनी नाराजगी जाहिर करने वाले युवाओं के संदेश को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, बीते कुछ महीनों में छात्रों ने जिस तरह अपनी चिंताओं को सामने रखा है, उसे नकारात्मक रूप से नहीं देखा जाना चाहिए। यह हम सभी सांसदों और हर सरकार के लिए एक चेतावनी है कि देश की परीक्षा प्रणाली को पहले से कहीं अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों का आक्रोश व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को उजागर करता है और इसे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए।
एंटी पेपर लीक बिल पर क्या बोले सांसद?लोकसभा से पारित हो चुके एंटी पेपर लीक बिल को नीट-यूजी पेपर लीक के बाद देशभर में उठे विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में लाया गया है। इस विधेयक का उद्देश्य परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। इसमें दोषियों के लिए कड़ी सजा, न्यूनतम कारावास की अवधि तय करने, अधिक जुर्माना लगाने और मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।
सुब्बा ने कहा कि विभिन्न राज्यों के छात्रों ने लगातार यह मांग उठाई थी कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो और सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन में जवाबदेही तय की जाए। उनका कहना था कि नकल और पेपर लीक अब केवल अलग-अलग घटनाएं नहीं रह गई हैं, बल्कि यह एक संगठित आपराधिक नेटवर्क का रूप ले चुकी हैं, जिसमें बड़े पैमाने पर आर्थिक लेन-देन भी शामिल होता है।
आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर पड़ता है सबसे ज्यादा असरSKM सांसद ने सदन में कहा कि ऐसे संगठित गिरोहों का सबसे अधिक फायदा उन उम्मीदवारों को मिलता है, जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं और अवैध तरीकों का सहारा ले सकते हैं। दूसरी ओर, सीमित संसाधनों के बावजूद कड़ी मेहनत करने वाले छात्र इस व्यवस्था में सबसे अधिक नुकसान उठाते हैं।
उन्होंने कहा कि लाखों युवा अपने भविष्य को संवारने के लिए सार्वजनिक परीक्षाओं पर निर्भर रहते हैं। यदि पेपर लीक या अन्य अनियमितताओं के कारण मेहनती अभ्यर्थियों का हक छिन जाता है, तो इससे केवल परीक्षा प्रणाली ही नहीं, बल्कि उनके पूरे भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
जांच में देरी से न्याय का उद्देश्य कमजोर पड़ता हैइंद्र हांग सुब्बा ने यह भी कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों की जांच तय समयसीमा के भीतर पूरी होनी चाहिए। उनके मुताबिक यदि जांच लंबे समय तक खिंचती रहती है तो पीड़ित छात्रों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता।
उन्होंने कहा, जब कोई उम्मीदवार पेपर लीक या अनुचित साधनों के जरिए बेहतर प्रदर्शन कर लेता है और मेहनत करने वाला छात्र पीछे रह जाता है, तो यह केवल परीक्षा व्यवस्था की विफलता नहीं होती, बल्कि एक युवा के भविष्य के साथ भी अन्याय होता है। इसलिए ऐसे मामलों की जांच समयबद्ध तरीके से पूरी कर दोषियों को जल्द सजा मिलनी चाहिए।