चीन में एक बार फिर एनल स्वाब (Anal Swab) यानी गुदा से कोरोना के नमूने लेने के विवादास्पद नियम को लागू कर दिया गया है। चीनी समाचार पत्र 'द बीजिंग न्यूज' के अनुसार, बीजिंग में एक अपार्टमेंट में कम से कम 27 लोगों के नमूने मलद्वार से लिए गए। इनमें एक 26 साल की महिला भी शामिल थी। आपको बता दे, 2022 शीतकालीन ओलंपिक (Winter Olympics 2022 ) आगामी 4 से 20 फरवरी 2022 तक चीन की राजधानी बीजिंग समेत उसके पड़ोसी शहरों यानकिंग और चोंगली के नजदीक स्थानों पर होने वाला है। जिसके चलते चीन ने ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर सख्ती बरतनी शुरू कर दी है।
गुदा परीक्षण के तहत मलाशय में 2 इंच (5 सेमी) तक एक टेस्टिंग किट को डाला जाता और इसे कई बार घुमाया जाता है। लैब में जांच करने से पहले स्वाब को हटा दिया जाता है। चीनी डॉक्टरों का मानना है कि इस तरीके से कोरोना की ज्यादा सटीक जांच होती है।
चीन के हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि बिना लक्षण वाले कुछ कोरोना मरीज जल्दी ठीक हो जाते हैं। उनके गले या नाक में 3 से 5 दिन बाद वायरस नहीं मिलता, लेकिन इसके बावजूद वायरस उनके शरीर में मौजूद रहता है ऐसे में मलद्वार से लिए गए नमूनों की जांच करने पर कोविड वायरस की आसानी से पहचान की जा सकती है।
चीन के हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि एनल स्वैब से कोरोना वायरस की मौजूदगी ज्यादा पुख्ता और सटीक होती है। यह तरीका गले या नाक की स्वैब टेस्टिंग से ज्यादा संवेदनशील है। इससे ज्यादा आसानी ये पता चलता है कि कोई इंसान कोरोना संक्रमित है या नहीं।
जीरो कोरोना पॉलिसी लागूआपको बता दे, चीन में 'जीरो कोरोना पॉलिसी' लागू है यानी कोरोना का एक मरीज मिलने पर भी सख्त से सख्त लॉकडाउन लगाने का प्रावधान है। इस दौरान लोगों को घरों में ही कैद रहना होता है। अब ओलंपिक के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही के चलते चीन की प्रतिष्ठा कम न हो, इसलिए गुदा स्वाब का नियम लागू कर दिया गया है।