काेविड-19 वायरस एक आरएनए वायरस है, इसे जिंदा रहने के लिए ह्यूमन बाॅडी जरूरी है और यह एक इंसानी शरीर से दूसरे में फैल कर अपनी सरंचना बदलता रहता है। इसके लिए जरूरी है, इसे सही एन्वायरनमेंट मिले। जुलाई से नवंबर तक वायरस हाई ग्रेड लेवल पर था यानी तेजी से म्यूटेशन करके अपना स्ट्रक्चर बदल रहा था।
नवंबर में पीक के दौरान शहर के 90 से 100 इलाकों में पहुंच चुके कोरोना की संक्रमण दर 10% तक पहुंच गई थी। रोजाना 700 पार नए मरीज सामने आने लगे थे। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के कारण वायरस का ट्रांसमिशन ह्यूमन टू ह्यूमन कम हुआ। इंसानों में एंटी बॉडी डवलप हुई तो वायरस कमजोर पड़ गया और खुद को रेप्लिकेट नहीं कर पाया।पिछले पखवाड़े के आंकड़ों पर गौर करें तो 10 से 15 इलाकों में सिमटे वायरस की संक्रमण दर 1% से भी नीचे आ गई है। यूं समझें- 17 से 31 जनवरी तक शहर में 53046 सैम्पल लिए गए यानी रोजाना औसतन 3500 जांचें हुईं। इनमें केवल 471 पाॅजिटिव मिले और मौतें महज 4 हुईं। 1% से नीचे संक्रमण दर वह स्टेज है, जब लो-ग्रेड लेवल पर वायरस सर्वाइवल मोड पर जा चुका है यानी खुद को जिंदा रखने की जद्दोजहद में जुटा है। रिस्क लेवल कम है, लेकिन सावधानी जरूरी है।