महिला आरक्षण-परिसीमन बिल पर BJD ने रखीं शर्तें, नवीन पटनायक ने समर्थन से पहले उठाए बड़े सवाल

गुरुवार (16 अप्रैल) को संसद में पेश होने वाले महिला आरक्षण संशोधन बिल से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। जहां एक ओर कांग्रेस और उसके नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन ने इस बिल का विरोध करने का संकेत दिया है, वहीं आमतौर पर NDA का समर्थन करने वाले बीजू जनता दल (BJD) ने इस बार अपना रुख सशर्त कर दिया है। पार्टी प्रमुख और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस मुद्दे पर एक नया मोड़ लाते हुए समर्थन से पहले कुछ अहम शर्तें सामने रख दी हैं।

बुधवार को नवीन पटनायक ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर परिसीमन और महिला आरक्षण बिल का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का समर्थन तभी संभव होगा, जब राज्य के राजनीतिक अधिकारों की पूरी तरह से रक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि इस विषय पर गंभीरता से कदम उठाए जाएं और राज्य के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता न हो।

राजनीतिक अधिकारों को लेकर जताई चिंता

अपने पत्र में पटनायक ने साफ कहा कि यह केवल आंकड़ों का मामला नहीं है, बल्कि संविधान में निहित सहकारी संघवाद की भावना से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ओडिशा के राजनीतिक अधिकारों में किसी भी तरह की कटौती होती है, तो इससे राज्य और वहां के लोगों की आकांक्षाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे को मजबूती से उठाएं, क्योंकि उनके पास ऐसा करने की वैध और नैतिक जिम्मेदारी दोनों हैं। पटनायक ने यह भी कहा कि BJD इस मामले में राज्य सरकार के साथ खड़ी रहेगी।

विशेष सत्र बुलाने की मांग

नवीन पटनायक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ओडिशा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग भी की है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगले 48 घंटों के भीतर विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित किया जाए, जिसमें एक प्रस्ताव पारित कर यह सुनिश्चित किया जाए कि ओडिशा के राजनीतिक अधिकारों का जरा सा भी हिस्सा अन्य राज्यों को न दिया जाए।

उन्होंने एक ओड़िया नागरिक के तौर पर मुख्यमंत्री से इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने की अपील की और कहा कि यह राज्य के भविष्य और विकास से जुड़ा अहम सवाल है।
महिला आरक्षण के समर्थन में BJD

महिला आरक्षण बिल को लेकर पटनायक ने सकारात्मक रुख भी जाहिर किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व की पक्षधर रही है। उन्होंने अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने ही सबसे पहले महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में पहल की थी।

उन्होंने यह भी बताया कि ओडिशा में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है और BJD संसद तथा विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए हमेशा समर्थन करती रही है।

परिसीमन से जुड़ा है आरक्षण का मामला

नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है, जो परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। केंद्र सरकार की योजना है कि 2029 के आम चुनावों से पहले इस आरक्षण को लागू किया जाए। इसके लिए 2023 के कानून में संशोधन कर परिसीमन प्रक्रिया को 2027 की जनगणना से अलग करने की तैयारी है।

हालांकि, इस संवैधानिक संशोधन को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जो फिलहाल सरकार के पास नहीं है। ऐसे में नवीन पटनायक का रुख सरकार के लिए चुनौती बन सकता है।

सीटों में बढ़ोतरी और विपक्ष की चिंता

सूत्रों के अनुसार, सरकार लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव ला सकती है, जिसमें 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। वर्तमान में लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं।

हालांकि सीटों में संभावित 50 प्रतिशत बढ़ोतरी के बावजूद विपक्षी दलों ने चिंता जताई है कि यह वृद्धि सभी राज्यों के लिए समान अनुपात में नहीं होगी। INDIA गठबंधन के नेताओं का दावा है कि प्रस्तावित परिसीमन से दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।

संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत परिसीमन की प्रक्रिया जनसंख्या के आधार पर तय होती है। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और भी तेज होने की संभावना है।