वंदे मातरम् को लेकर सियासी घमासान तेज, जीतन राम मांझी ने विरोधियों को दी कड़ी चेतावनी

राष्ट्र गीत वंदे मातरम् को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वंदे मातरम् के पूर्ण गायन का विरोध करने वालों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। हालांकि, उन्होंने अपने पोस्ट में किसी राजनीतिक दल या नेता का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया।

मांझी ने अपने संदेश में उन लोगों को निशाने पर लिया, जिन्हें उन्होंने 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' कहा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ऐसे लोग समय रहते अपनी सोच नहीं बदलते तो उन्हें जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पूरे संस्करण के बजाय केवल दो छंद गाने के फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है।

मांझी ने X पर क्या कहा?


जीतन राम मांझी ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि कुछ लोग संसद से पारित राष्ट्र गीत वंदे मातरम् के भी हिस्से किए जाने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे लोग नहीं सुधरे तो जनता उन्हें इसका जवाब देगी।

मांझी के इस बयान में किसी पार्टी अथवा व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया है। हालांकि, उनका पोस्ट कांग्रेस की ओर से वंदे मातरम् के केवल दो छंद गाने के फैसले को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आया है।

कांग्रेस ने लिया सिर्फ दो छंद गाने का फैसला

वंदे मातरम् को लेकर विवाद की शुरुआत कांग्रेस के भीतर लिए गए एक फैसले के बाद हुई। हाल ही में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक हुई, जिसमें राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के 88 वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

बैठक में तय किया गया कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का वही हिस्सा गाया जाएगा, जो पहले से पार्टी के कार्यक्रमों में गाया जाता रहा है। यानी पूरे गीत के बजाय इसके दो छंदों के गायन का फैसला किया गया। इसी निर्णय के बाद इसे लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
वंदे मातरम् को लेकर सामने आए कई बयान

वंदे मातरम् के पूर्ण गायन को लेकर कांग्रेस नेताओं की ओर से भी अलग-अलग टिप्पणियां सामने आई हैं। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि वह अल्लाह के अलावा किसी अन्य के सामने सजदा नहीं कर सकते। उनके इस बयान को भी वंदे मातरम् विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस मुद्दे पर कांग्रेस पर निशाना साध चुके हैं। शाह ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए 1937 के घटनाक्रम का जिक्र किया और कहा कि उस समय लिए गए फैसलों ने देश के विभाजन की नींव रखी थी।

संसद और लाल किले पर भी हुआ वंदे मातरम् का गायन

रिपोर्ट के अनुसार, स्वतंत्रता के 80 साल बाद वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने की दिशा में कदम उठाया गया और 30 जुलाई को संसद से संबंधित कानून पारित हुआ। इसके बाद 13 अगस्त को संसद में पहली बार वंदे मातरम् गाया गया। 15 अगस्त को लाल किले पर भी इसका गायन हुआ।

हालांकि, इसी दिन कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण नहीं गाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। इसके बाद 17 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा भी वंदे मातरम् के पूरे गीत के बजाय इसके एक हिस्से के गायन का मामला चर्चा में रहा। 18 अगस्त को खड़गे ने वंदे मातरम् से जुड़े कानून पर सवाल उठाए।

इसके अगले दिन कांग्रेस की ओर से कार्यक्रमों में केवल दो छंद गाने का निर्णय सामने आया। इस फैसले के बाद भाजपा और सहयोगी दलों के नेताओं की ओर से कांग्रेस पर सवाल उठाए गए। अब जीतन राम मांझी की तीखी टिप्पणी ने इस राजनीतिक बहस को और गर्म कर दिया है।