अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा के बाद, इस मुद्दे पर भारत सरकार की ओर से केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार अमेरिका के इस कदम से उत्पन्न होने वाले संभावित प्रभावों की गंभीरता से समीक्षा कर रही है और भारत अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए सभी संभावित उपाय करने को प्रतिबद्ध है।
पीयूष गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अब वैश्विक मंच पर एक उभरती महाशक्ति है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हो चुकी हैं अहम चर्चाएंलोकसभा में वक्तव्य देते हुए मंत्री ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई अहम बैठकें हो चुकी हैं। 2 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति ट्रंप ने पारस्परिक टैरिफ को लेकर कार्यकारी आदेश जारी किया था, जिसके बाद तीन दिनों के भीतर 10% बेसलाइन टैरिफ लागू कर दिया गया। भारत पर कुल 26% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया, जिसे पहले 90 दिनों के लिए स्थगित किया गया और बाद में इसे 1 अगस्त तक के लिए टाल दिया गया, गोयल ने बताया।
भारत अपने उद्योगों और किसानों के हितों की करेगा रक्षाउन्होंने संसद को अवगत कराया कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत मार्च में शुरू हुई थी। इसका पहला चरण अक्टूबर-नवंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। पहली बैठक दिल्ली में हुई और आगे की बैठकें वाशिंगटन डीसी में आयोजित की गईं। इसके अलावा दोनों देशों के बीच कई वर्चुअल बैठकें भी की गईं।
पीयूष गोयल ने दोहराया कि भारत सरकार घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, भारत का वैश्विक विकास में 16% योगदान है और हम अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का दृष्टिकोण 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का है और इस लक्ष्य को लेकर सभी प्रयास जारी हैं।
अमेरिका की घोषणा भारत पर दबाव की रणनीति?1 अगस्त से भारत पर 25% टैरिफ लगाने की अमेरिकी घोषणा के साथ-साथ ट्रंप ने रूस से तेल और रक्षा उपकरण खरीदने को लेकर भारत पर आर्थिक दंड लगाने की बात भी कही है। विश्लेषकों का मानना है कि यह अमेरिका की ओर से भारत पर अपनी शर्तें मनवाने का दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है।
ट्रंप प्रशासन पहले ही जापान, ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन जैसे अपने सहयोगी देशों के साथ कई अनुकूल व्यापारिक समझौते कर चुका है। ऐसे में भारत के साथ यह सख्त रुख अमेरिका की नई व्यापार नीति का हिस्सा बताया जा रहा है।