शिक्षा और भर्ती व्यवस्था पर बरसे रामदेव, बोले- ‘सुधर जाओ, नहीं तो आंदोलन करना पड़ेगा’

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में योगगुरु रामदेव ने देश की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी भर्तियों को लेकर कई सवाल उठाए। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने स्कूलों में शिक्षकों, बिजली, पानी और शौचालय जैसी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। साथ ही उन्होंने पेपर लीक और सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी चिंता जताई।

रामदेव ने कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े इन मुद्दों पर व्यवस्था को सुधारने की जरूरत है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अगर हालात नहीं सुधरे तो देश में आंदोलन की स्थिति बन सकती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह आंदोलन के नाम पर अराजकता का समर्थन नहीं करते।

स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं पर उठाए सवाल

रामदेव ने कहा कि देश के कई छोटे स्कूलों से निकलने वाले बच्चे बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायत करते हैं। उनके मुताबिक, कहीं शिक्षक नहीं हैं तो कहीं बिजली, पानी और शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों के बीच तालमेल की समस्या का भी जिक्र किया। रामदेव ने कहा कि कई जगह किताबें होने के बावजूद शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं और कहीं शिक्षक हैं तो किताबों की कमी है। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाते हुए पेपर लीक की समस्या का उल्लेख किया।

रामदेव के मुताबिक, 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं तथा प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं से जुड़ी मौजूदा व्यवस्था पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत है, क्योंकि उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

सरकारी भर्ती में भ्रष्टाचार का लगाया आरोप


सरकारी नौकरियों में चयन प्रक्रिया को लेकर रामदेव ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इंटरव्यू के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां होती हैं और कई बार योग्यता के बजाय व्यक्तिगत संबंध, विचारधारा, संगठन, जाति या वर्ग जैसे आधारों को प्राथमिकता मिलने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि देश में एक ओर ‘सत्यमेव जयते’ की बात होती है, लेकिन दूसरी तरफ भर्ती प्रक्रिया को लेकर भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती हैं। रामदेव ने भर्ती में पैसे के लेन-देन का भी आरोप लगाया।

इन दावों को रामदेव के आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध सामग्री में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित पक्ष का जवाब मौजूद नहीं है।

‘सुधर जाओ, नहीं तो आंदोलन करना पड़ेगा’

शिक्षा और भर्ती से जुड़े मुद्दों पर रामदेव ने सरकार और व्यवस्था को सुधार की दिशा में कदम उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि समस्याएं इसी तरह बनी रहीं तो आंदोलन की जरूरत पड़ सकती है।

हालांकि, रामदेव ने आंदोलन और अराजकता के बीच अंतर करते हुए कहा कि वह अराजकता के समर्थक नहीं हैं। उन्होंने देश में कथित घपलों को लेकर चिंता जताते हुए दोबारा आंदोलन की स्थिति पैदा होने की आशंका व्यक्त की।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के अभियान का भी जिक्र

शिक्षा और पेपर लीक के मुद्दे पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पहले जंतर-मंतर पर आंदोलन कर चुकी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, संगठन ने पेपर लीक के मुद्दे को लेकर वहां 36 दिन तक प्रदर्शन किया था।

अब संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ग्रामीण सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए नया अभियान शुरू करने की तैयारी में हैं। इस अभियान का फोकस स्कूलों की स्थिति और आवश्यक सुविधाओं से जुड़े सवालों पर है।

अभिजीत दीपके ने अमित शाह पर लगाए आरोप

इसी संदर्भ में अभिजीत दीपके ने 20 जुलाई को संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाना बनाया। दीपके ने मांग की कि इस मामले को लेकर संसद में माफी मांगी जानी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पेलेट गन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया तथा इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री को जिम्मेदारी स्पष्ट करनी चाहिए। उपलब्ध सामग्री में इन आरोपों पर अमित शाह या सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

इस पूरे घटनाक्रम में शिक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया और पेपर लीक जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आए हैं। रामदेव ने जहां व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर जोर दिया, वहीं उन्होंने आंदोलन को अराजकता से अलग रखने की बात भी कही।

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