पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से पहले ही सियासी हलचल तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा के लिए 25 मार्च 2026 को ऑल पार्टी मीटिंग आयोजित करने का फैसला किया है। हालांकि, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने इस बैठक में शामिल न होने का निर्णय लिया है। उन्होंने खुद इसकी वजह भी सार्वजनिक करते हुए बताया कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कारण वे इसमें शामिल नहीं हो पाएंगे।
केरल दौरे के चलते बैठक से दूरीRahul Gandhi ने स्पष्ट किया कि जिस दिन यह बैठक रखी गई है, उस दिन उनका केरल में पहले से तय कार्यक्रम है, जिसके चलते उनकी उपस्थिति संभव नहीं होगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की सर्वदलीय बैठक पहले ही आयोजित की जानी चाहिए थी। उनके अनुसार, सरकार ने इस पूरे मामले में संरचनात्मक स्तर पर गंभीर चूक की है, जिसे अब सुधारना आसान नहीं होगा और इसमें लंबा समय लग सकता है।
केंद्र सरकार की नीतियों पर उठाए सवालबैठक से दूरी बनाने के साथ-साथ राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की विदेश नीति अब संतुलित और स्वतंत्र नहीं रह गई है, बल्कि यह कुछ हद तक बाहरी प्रभावों पर निर्भर होती जा रही है। उनका कहना था कि सरकार को अंतरराष्ट्रीय मामलों में देशहित को सर्वोपरि रखना चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात में ऐसा नहीं दिख रहा है।
‘विदेश नीति निजी सोच तक सीमित’राहुल गांधी ने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति अब एक संस्थागत प्रक्रिया न होकर एक व्यक्ति विशेष की सोच तक सीमित होती नजर आ रही है। उन्होंने इसे चिंताजनक बताते हुए कहा कि यदि नीति निर्माण में संतुलन और पारदर्शिता नहीं होगी, तो इसका असर देश की वैश्विक छवि पर पड़ सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय हालात का असर आम लोगों पर भी पड़ेगा, खासकर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों और उपलब्धता पर।
संसद में सरकार की प्रतिक्रियावहीं, दूसरी ओर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में राज्यसभा में इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर भारत पूरी तरह सतर्क है और लगातार वैश्विक स्तर पर संपर्क बनाए हुए है। प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि उन्होंने इस संकट की शुरुआत के बाद से क्षेत्र के कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बातचीत की है।
कूटनीति के जरिए समाधान पर जोरप्रधानमंत्री Narendra Modi ने यह भी दोहराया कि भारत का मुख्य उद्देश्य संवाद और कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि भारत ईरान, इजरायल और अमेरिका समेत सभी प्रमुख देशों के संपर्क में है और स्थिति को सामान्य बनाने के लिए प्रयासरत है। साथ ही, हॉर्मुज मार्ग को सुचारू रखने और वैश्विक व्यापार पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए भी चर्चा की जा रही है।