राहुल गांधी ने नेहा सिंह राठौर से कहा- ‘मैं भी नहीं सुधर रहा’, आलोचना और गालियों पर खुलकर बोले

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में आयोजित युवा संपर्क कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ में भोजपुरी गायिका नेहा सिंह राठौर से बातचीत के दौरान आलोचना और गालियों का मुद्दा उठाया। नेहा ने सरकार से सवाल करने पर अपने अनुभव साझा किए, जिस पर राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें भी वर्षों से इसी तरह की आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। नेहा की बात के संदर्भ में उन्होंने कहा, “मैं भी नहीं सुधर रहा हूं।”

नेहा सिंह राठौर ने उठाया महिलाओं से जुड़े सवालों का मुद्दा


कार्यक्रम के दौरान नेहा सिंह राठौर ने महिलाओं के सम्मान और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं सत्ता में बैठे लोगों से सवाल ही नहीं कर सकतीं, तो उनके सम्मान की बात करना कितना सार्थक है।

नेहा ने बताया कि वह सरकार से उन मुद्दों पर सवाल उठाती हैं, जिन्हें लेकर असहमति होती है। उनके मुताबिक, ऐसा करने पर उन्हें गालियों के साथ-साथ एफआईआर का भी सामना करना पड़ा है। उन्होंने सवाल किया कि लोकतंत्र में अगर प्रधानमंत्री से सवाल पूछना संभव नहीं है, तो फिर महिलाओं के सम्मान का अर्थ क्या रह जाता है।
शादी के बाद व्यंग्य गीत को लेकर साझा किया अनुभव

नेहा सिंह राठौर ने शादी के बाद उत्तर प्रदेश में एक व्यंग्य गीत गाने से जुड़े अपने अनुभव का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, गीत के बाद पुलिस की टीमें उनके पीछे भेजी गई थीं और इलाके के लोगों ने उनके परिवार से उनके बारे में सवाल किए थे।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखना आसान नहीं है। नेहा के मुताबिक, पुरुषों को भी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है, लेकिन महिलाओं के मामले में अक्सर उनके चरित्र को लेकर सवाल उठाए जाते हैं।

‘आलोचना से नहीं डरती’

नेहा ने खुद को साहसी और जिद्दी बताते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों से उन्हें गालियां दी जा रही हैं, लेकिन उन्होंने अपनी बात रखना बंद नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में भी वह आलोचना के डर से पीछे हटने वाली नहीं हैं।

नेहा की इसी बात पर राहुल गांधी ने अपने अनुभव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें भी लंबे समय से गालियां और आलोचनाएं झेलनी पड़ रही हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने नेहा की बात दोहराते हुए कहा, “मैं भी नहीं सुधर रहा हूं।”

राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्रता पर दिया जोर

कार्यक्रम में राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता पर भी बात की। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने पिता, पति या बेटे की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि उनका अपना स्वतंत्र अस्तित्व है। उन्होंने युवतियों से सामाजिक पाबंदियों से आगे बढ़ने और अपनी क्षमताओं पर भरोसा करने की अपील की।

महिला हिंसा को लेकर आंकड़ों का किया जिक्र


राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान महिला हिंसा और उत्पीड़न से जुड़े कुछ आंकड़ों का भी हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि हर साल 4.5 लाख कन्या भ्रूण हत्या के मामले होते हैं। उनके मुताबिक, 80 प्रतिशत महिलाओं को उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है और 29 प्रतिशत महिलाएं शारीरिक हिंसा का अनुभव करती हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि सामाजिक बदनामी के डर से यौन हिंसा के 99 प्रतिशत मामले दर्ज नहीं होते, जबकि 60 प्रतिशत महिलाएं अकेले घर से बाहर नहीं निकल सकतीं।

करीब 15 हजार महिलाओं ने लिया हिस्सा

आयोजकों के अनुसार, ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में करीब 15 हजार महिलाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम को युवाओं, खासकर Gen Z तक पहुंचाने के लिए गायकों और एक रैपर को भी शामिल किया गया था।

राहुल गांधी के एआईएसएसएमएस कॉलेज ग्राउंड पहुंचने पर वहां मौजूद लोगों ने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर उनका स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में जब उनसे पुणे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया, “पुणे लव है।”