'विदेश जाकर भारत की छवि खराब करेंगे तो जनता सबक सिखाएगी' – राहुल गांधी के बयानों पर BJP का पलटवार

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हालिया कोलंबिया दौरे में दिए गए बयानों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ऐसे अवसरों पर जहां पूरा देश विजयादशमी जैसे पावन पर्व की शुभकामनाओं का आदान-प्रदान कर रहा था, वहीं राहुल गांधी भारत की छवि धूमिल करने में लगे थे।

रविशंकर प्रसाद का सीधा हमला


भाजपा सांसद ने कहा कि राहुल गांधी देश के भीतर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार पर निराधार आरोप लगाते हैं और विदेश में भी यही दोहराते हैं। प्रसाद ने कहा, “अगर भारत में किसी को सबसे ज्यादा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिली है तो वह राहुल गांधी हैं। वे खुलकर प्रधानमंत्री और सरकार की आलोचना करते हैं, लेकिन फिर भी यह कहना कि भारत में लोकतंत्र नहीं है, सरासर गलत है।”

उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा, “अगर आप विदेशी धरती पर भारत की छवि को चोट पहुँचाएंगे तो जनता आपको बचे-खुचे राजनीतिक अवसर भी नहीं देगी। उनके ऐसे बयानों की हम कड़ी निंदा करते हैं।”

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

दरअसल, राहुल गांधी ने कोलंबिया के ईआईए विश्वविद्यालय में छात्रों और शिक्षकों से बातचीत के दौरान भारत की राजनीतिक व सामाजिक स्थिति पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं से भरा देश है—यहाँ अलग-अलग धर्म, भाषाएं और परंपराएं मौजूद हैं और लोकतंत्र ही वह साधन है जो इन सबको एक सूत्र में पिरोता है।

हालांकि राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि फिलहाल भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं और स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस समय लोकतंत्र पर व्यापक स्तर पर हमला हो रहा है, जो भारत की सबसे बड़ी चुनौती है।

भारत-चीन की तुलना

विश्व राजनीति में भारत की भूमिका पर सवाल पूछे जाने पर राहुल गांधी ने कहा कि भारत और चीन की संरचना पूरी तरह भिन्न है। चीन एक केंद्रीकृत और एकरूप व्यवस्था वाला राष्ट्र है, जबकि भारत असंख्य भाषाओं, परंपराओं और धर्मों का संगम है। उन्होंने कहा कि भारत की 1.4 अरब की आबादी अपने भीतर अपार संभावनाएं समेटे हुए है, और यह विविधता ही भारत की असली ताकत है।

'लोकतंत्र संवाद का सेतु है'

राहुल गांधी ने आगे कहा कि भारत अपने लोगों के बीच संवाद और विचार-विमर्श का केंद्र है। यहाँ विभिन्न धर्मों, परंपराओं और विचारधाराओं को स्थान देने का सबसे उपयुक्त साधन लोकतांत्रिक व्यवस्था ही है। लेकिन मौजूदा समय में इस पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

इंजीनियरिंग छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ वह चीन का पड़ोसी भी है और अमेरिका का रणनीतिक साझेदार भी। इस स्थिति में भारत को अपनी लोकतांत्रिक विरासत को मजबूत बनाकर ही वैश्विक ताकतों के बीच संतुलन साधना होगा।