लगातार 5 बार सांसद, RSS से जुड़ाव और लंबा संगठनात्मक अनुभव; जानिए नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के बारे में

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार शाम केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और फिलहाल नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। दो दशकों से अधिक लंबे राजनीतिक अनुभव, संगठन में मजबूत पकड़ और संसदीय कार्यों में सक्रिय भूमिका के कारण उन्हें पार्टी का भरोसेमंद चेहरा माना जाता है।

कर्नाटक के विजयपुर में 27 नवंबर 1962 को जन्मे प्रह्लाद जोशी की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा हुबली में हुई, जहां से उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन से ही उनका झुकाव सामाजिक और राष्ट्रवादी गतिविधियों की ओर रहा। युवावस्था में ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए, जिससे उनके संगठनात्मक कौशल को नई दिशा मिली। 1990 के दशक में हुबली के ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने के आंदोलन सहित कई जन अभियानों में उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई। इन्हीं आंदोलनों के दौरान उन्होंने भाजपा संगठन में अपनी अलग पहचान बनाई और धीरे-धीरे कर्नाटक की राजनीति में एक प्रभावशाली नेता के रूप में उभरे।
भाजपा संगठन से शुरू हुई राजनीतिक यात्रा

प्रह्लाद जोशी की राजनीतिक यात्रा भारतीय जनता पार्टी के जिला संगठन से शुरू हुई। उन्होंने धारवाड़ जिले में पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए लंबे समय तक काम किया और संगठन की कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। उनकी मेहनत और संगठनात्मक क्षमता के चलते उन्हें लगातार नई जिम्मेदारियां मिलती रहीं।

वर्ष 2004 में उन्होंने पहली बार कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर संसद पहुंचे। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी लगातार जीत दर्ज कर उन्होंने इस सीट पर अपना मजबूत जनाधार कायम रखा। लगातार पांच बार लोकसभा सांसद चुने जाने के बाद उनकी पहचान कर्नाटक भाजपा के सबसे प्रभावशाली और अनुभवी नेताओं में होने लगी।

2012 में मिली प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी


प्रह्लाद जोशी के राजनीतिक करियर में बड़ा मोड़ वर्ष 2012 में आया, जब उन्हें कर्नाटक भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। इस जिम्मेदारी के दौरान उन्होंने राज्य में संगठन को मजबूत करने और पार्टी के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया। उनके नेतृत्व में भाजपा ने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण प्रयास किए।

इसके बाद वर्ष 2014 से उन्होंने लोकसभा की विभिन्न संसदीय समितियों और अध्यक्षीय पैनल में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। संसदीय प्रक्रियाओं की गहरी समझ और समन्वय की क्षमता के कारण पार्टी नेतृत्व का उन पर भरोसा लगातार बढ़ता गया।

मोदी सरकार में कई अहम मंत्रालयों की संभाली जिम्मेदारी


साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के दौरान प्रह्लाद जोशी को संसदीय कार्य मंत्रालय, कोयला मंत्रालय और खान मंत्रालय जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इन मंत्रालयों में रहते हुए उन्होंने संसद के सुचारु संचालन, कोयला उत्पादन बढ़ाने, खनन क्षेत्र में सुधार और नीतिगत फैसलों को लागू करने में अहम भूमिका निभाई।

इसके बाद 2024 में तीसरी मोदी सरकार के गठन के साथ उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ-साथ नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का दायित्व सौंपा गया। अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद उनके पास केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी आ गई है।

शिक्षा मंत्रालय में सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां

प्रह्लाद जोशी को संगठन और प्रशासन दोनों क्षेत्रों में अनुभवी नेता माना जाता है। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उनके सामने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने जैसी कई बड़ी चुनौतियां होंगी।

इसके अलावा हाल के वर्षों में परीक्षा प्रणाली को लेकर उठे सवालों और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग के बीच शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी के लंबे राजनीतिक अनुभव, संगठनात्मक दक्षता और प्रशासनिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए उन्हें यह अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अहम सुधारों को गति मिल सके।