पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए देशवासियों से धैर्य और संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि जैसे देश ने कोरोना काल में एकजुटता और धैर्य के साथ चुनौतियों का सामना किया था, उसी तरह मौजूदा वैश्विक संकट में भी हमें संयम और सजगता के साथ आगे बढ़ना होगा। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव और उसके अंतरराष्ट्रीय असर को देखते हुए प्रधानमंत्री का यह संबोधन काफी अहम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि सरकार पूरी तरह सतर्क है और बदलते वैश्विक परिदृश्य पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि हाल ही में एक उच्च स्तरीय बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात की समीक्षा की गई, जिसमें यह आकलन किया गया कि इस संकट का भारत के तेल आयात, उर्वरक आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों पर क्या असर पड़ सकता है। बैठक में अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई, ताकि देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित न हो।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि देश में पेट्रोल, डीजल, गैस और खाद जैसी जरूरी चीजों की उपलब्धता बनी रहे। उन्होंने बताया कि भारत की बड़ी मात्रा में ऊर्जा आवश्यकताएं होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते पूरी होती हैं, लेकिन मौजूदा संघर्ष के चलते वहां जहाजों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो गई है। इसके बावजूद सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है कि सप्लाई चेन बाधित न हो और आम जनता को किसी तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीयों को सुरक्षित देश वापस लाया जा चुका है। इसके लिए विभिन्न देशों में 24 घंटे कंट्रोल रूम और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित की गई हैं, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में जिन भारतीयों की जान गई है या जो घायल हुए हैं, उनके परिवारों को हरसंभव मदद दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस संकट के दौरान भारत ने कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाई है और उन्होंने स्वयं कई देशों के नेताओं से बातचीत कर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस युद्ध ने भारत के सामने कई नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ये चुनौतियां केवल आर्थिक नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हैं। पश्चिम एशिया क्षेत्र भारत के लिए व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख केंद्र है, इसलिए वहां की स्थिति का सीधा प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक समुदाय से भी इस संकट के शांतिपूर्ण समाधान की अपील की। उन्होंने कहा कि युद्ध का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर पड़ता है। ऐसे में सभी पक्षों को संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान तलाशना चाहिए।
सरकार की रणनीति पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत वैकल्पिक स्रोतों से तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अन्य देशों के साथ संपर्क में है। इसके साथ ही वैकल्पिक समुद्री मार्गों पर भी नजर रखी जा रही है, ताकि जरूरी वस्तुएं बिना किसी बाधा के देश तक पहुंचती रहें। हाल के दिनों में कई जहाज सफलतापूर्वक भारत पहुंचे हैं, जो इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों का संकेत है।
अंत में प्रधानमंत्री ने दोहराया कि मौजूदा वैश्विक संकट का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और देशवासियों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि संयम और एकजुटता के साथ इस चुनौती का सामना करना होगा।